श्रावस्ती। जिले में संचालित खाद्य सामग्री की दुकानों पर घटिया और जानलेवा स्तर तक खतरनाक मिलावटी मिठाई, दूध बर्फी, पनीर, अरहर दाल, पान मसाला व खाद्य तेल समेत अन्य सामग्री बेची जा रही है। इसका खुलासा खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन (एफएसडीए) टीमों की कार्रवाई के बाद लैब जांच को भेजे गए नमूनों की जांच रिपोर्ट से हुआ है। दो साल के दौरान लैब जांच को भेजे गए विभिन्न खाद्य सामग्री के करीब सवा दो सौ नमूनों में से सौ से अधिक नमूने जांच में घटिया व अधोमानक होने के कारण रिपोर्ट में सुरक्षित श्रेणी में फेल आए हैं। जबकि दूध बर्फी, पनीर, अरहर दाल, खाद्य तेल, पान मसाला व नमकीन के एक दर्जन से अधिक नमूने जानलेवा स्तर तक खतरनाक मिलावट के कारण असुरक्षित श्रेणी में फेल आए हैं।
असुरक्षित श्रेणी में फेल आए नमूनों से जुड़े दुकान संचालकों के यहां अब मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय में मिलावटखोरी का आपराधिक वाद दाखिल कर आरोपियों को सजा दिलायी जाएगी जबकि सुरक्षित श्रेणी में फेल नमूनों से जुड़े दुकान संचालकों के खिलाफ न्याय दंडाधिकारी व एडीएम कोर्ट में वाद दाखिल कर जुर्माना लगेगा। विभागीय अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार बीते दो वर्ष के दौरान लैब जांच को भेजे गए नमूनों की जांच रिपोर्ट जिला इकाई को प्राप्त हुई है। इसके तहत 2020-21 में लिए गए 134 नमूनों में 56 नमूने और 2021-22 में जांच को भेजे गए 89 में से 83 की जांच रिपोर्ट मिली है। पचास फीसदी से ज्यादा नमूने जांच में फेल आए हैं। सबसे ज्यादा परेशानी व चिंता पनीर खोवा, अरहर दाल व खाद्य तेल समेत कई अन्य सामग्री के नमूनों में जानलेवा स्तर तक मिली खतरनाक मिलावट के कारण हुई है।
खोवा में केमिकल तो अरहर दाल में खेसारी की मिलावट
असुरक्षित श्रेणी में फेल आए खोवा व पनीर के नमूने की लैब जांच में जानलेवा स्तर तक खतरनाक केमिकल, डिटर्जेंट, घटिया दूध पाउडर तो हर घर में खायी जाने वाली अरहर दाल में खेसारी की मिलावट मिली। खेसारी दाल जैसी ही प्रतिबंधित खाद्य सामग्री होती है। दाल पर पालिस कर उसे चमकदार दिखाने के लिए भी खतरनाक कलर की मिलावट दाल में मिली। पान मसाला के असुरक्षित श्रेणी में फेल आए नमूने की जांच रिपोर्ट में भी कत्थे की जगह जानलेवा सिंथेटिक कत्था की मिलावट मिली। चिकित्सकों के अनुसार ऐसी मिलावटी सामग्री का सेवन पेट की कई खतरनाक बीमारियों के साथ हार्ट अटैक व लीवर से जुड़ी जानलेवा बीमारी के साथ ही शरीर के जोड़ो व त्वचा से जुड़ी बीमारी का कारण बनता है।
पांच लाख तक जुर्माना संग जेल की सजा
खाद्य पदार्थों की लैब जांच रिपोर्ट को दो श्रेणी में बांटा जाता है। अधोमानक, घटिया गुणवत्ता व पैकेजिंग में फेल नमूनों को सुरक्षित श्रेणी में फेल मानते हुए एडीएम कोर्ट में मुकदमा चलता है। इसमें एक हजार से पांच लाख तक के अर्थदंड की सजा का प्रावधान है। जबकि जानलेवा स्तर तक नुकसानदायक मिलावट के कारण फेल नमूनों को असुरक्षित श्रेणी में रखकर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के यहां केस चलता है। इसमें पांच लाख के अर्थदंड सहित तीन साल से आजीवन कारवास तक की सजा का प्राविधान है।
अर्थदंड की हुई वसूली
वर्ष 2020-21 में एडीएम न्यायालय में दर्ज सौ मामलों में से 71 मामलों में 14.88 लाख तो वर्ष 2021-22 में तीन लोगों से 59 हजार रुपये के अर्थदंड की वसूली की गयी। इस वर्ष के कुल 12 मामले अभी एडीएम न्यायालय में विचाराधीन है।
-सुनील कुमार शर्मा, जिला अभिहित अधिकारी