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मंदिरों में अब एक समय में पांच से अधिक लोग नहीं कर पाएंगे प्रवेश

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श्रावस्ती। तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण को लेकर प्रदेश के मुख्य सचिव राजेन्द्र प्रसाद तिवारी ने धार्मिक स्थलों के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। इन दिशा निदेर्शों के अनुसार धार्मिक स्थलों के प्रवेश द्वार पर हाथों को विसंक्रमित करने के लिए एल्कोहोल युक्त सैनिटाइजर का उपयोग किया जाए एवं इन्फ्रा रेड थर्मामीटर की व्यवस्था की जाए। एक बार में केवल पांच लोगों को ही प्रवेश दिया जाए।
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यह जानकारी देते हुए जिलाधिकारी टीके शिबु ने बताया कि धर्मस्थलों में उन लोगों को ही प्रवेश की अनुमति होगी जिनमें कोरोना के कोई भी लक्षण नहीं होंगे। सभी को फेस कवर / मास्क का प्रयोग करना होगा। धार्मिक स्थल परिसर में कोरोना से बचाव संबंधी उपायों के प्रचार प्रसार के लिए पोस्टर व स्टैंडी का प्रदर्शन जन जागरूकता के लिए किया जाए। श्रद्धालु अपने जूते-चप्पल अपने वाहन में ही रखें। परिसर के बाहर पार्किग स्थलों, दुकानों आदि पर पूरे समय छह फीट की शारीरिक दूरी का कड़ाई से पालन किया जाए।
शारीरिक दूरी को सुनिश्चित करने के लिए परिसर में व्यक्तियों के लाइन में खड़े होने के लिए 6-6 फिट की दूरी पर चिह्न अंकित किए जाएं। धर्मस्थल पर प्रवेश एवं निकासी की अलग-अलग व्यवस्था हो। धर्मस्थलों पर क्रॉस वेंटिलेशन का इस तरह से इंतजाम होना चाहिए कि ताजी हवा अंदर आ सके। एसी के प्रयोग के समय तापमान 24-30 डिग्री के मध्य होना चाहिए और आर्द्रता की सीमा 40 से 70 फीसद के मध्य होनी चाहिए। धार्मिक स्थलों में किसी भी प्रकार की सभाएं नहीं होंगी।
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पवित्र ग्रंथों, मूर्तियों और चित्रों को छूने अनुमति नहीं होगी। धर्मस्थल के भीतर किसी भी प्रसाद के वितरण अथवा पवित्र जल के छिड़काव की अनुमति नहीं होगी। शारीरिक दूरी का पालन करते हुए लंगर, सामुदायिक रसोई, अन्नदान के लिए भोजन तैयार किया जाएगा। परिसर के अंदर शौचालयों, हाथ-पैर धोने के स्थानों पर सफाई के विशेष उपाय करने होंगे। श्रद्धालु फेस कवर, मास्क, ग्लव्स आदि को सार्वजनिक स्थल पर नहीं छोड़ेंगे।
यदि परिसर में कोई संदिग्ध या उपचाराधीन मरीज का केस मिलता है तो उसे ऐसे स्थान पर रखना है जिससे वह अन्य व्यक्तियों से बिल्कुल अलग हो जाए। चिकित्सक द्वारा उसकी जांच होने तक उसे फेस कवर व मास्क दिया जाए। साथ ही उसे अस्पताल अथवा जिला स्वास्थ्य हेल्पलाइन नंबर 1800-180-5145 को सूचित किया जाए। नामित स्वास्थ्य प्राधिकारी द्वारा मरीज और उसके संपर्क में आये व्यक्तियों के संक्रमण के जोखिमों का मूल्यांकन कर उसके अनुसार कार्यवाही की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति संक्रमित हुआ तो परिसर को पूर्ण रूप से विसंक्रमित किया जाएगा।
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