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चुनाव चिन्ह आवंटित, मतदान के दिन पता चला नामांकन हो चुका खारिज

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श्रावस्ती। पंचायत चुनाव के लिए मतदान जिले में संपन्न हो चुका है। लेकिन मतदान के दिन पूरी प्रक्रिया अनुभवहीनता व अव्यवस्था से जूझती रही। लगभग सभी पंचायतों की मतदाता सूची से सैकड़ों नाम अपने आप गायब मिले। तो कुछ स्थानों पर कार्मिकों के कारण अव्यवस्था बनी रही। यहां तक कि एक प्रत्याशी को नामांकन प्रक्रिया के दौरान चुनाव चिह्न आवंटित कर दिया गया। लेकिन मतदान के दिन उसे पता चला कि उसका नामांकन ही खारिज हो गया है।
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पंचायत चुनाव इस बार जिले में अफरा तफरी व अव्यवस्था का पर्याय बना रहा। कर्मचारियों की अनुभवहीनता भी चुनाव के लिए किसी दंश से कम नहीं रहा। इसका उदाहरण कई स्थानों पर देखने को मिला। ग्राम पंचायत अहलादनगर के कोयलहवा बूथ पर सुबह नौ बजे से केवल इसलिए अफरातफरी की स्थिति थी कि मतदान कार्मिकों ने वोटरों को यह बताया कि यहां क्षेत्र पंचायत के वार्ड नंबर तेरह के लिए प्रत्याशी ही नहीं है। जबकि इस क्षेत्र के लिए कई प्रत्याशी मौजूद थे। इस केंद्र पर दो वोटरों को क्षेत्र पंचायत का पर्चा ही नहीं दिया गया। बाद में उन्हें बुला कर पुन: मतदान के लिए पर्चा उपलब्ध कराया गया।
इस केंद्र पर आलम यह रहा कि यहां मात्र 601 वोट डलवाने के लिए रात नौ बजे तक कतार लगी रही। यही स्थिति सिरसिया, जमुनहा के सागर गांव सहित अधिकांश केंद्रों पर देखने को मिली। इसका कारण था कि मतदान में लगे सभी कार्मिक नए थे, और उनको यह अनुभव ही नहीं था। जिसके चलते एक मतदाता पर कम से कम 10 से 15 मिनट का समय लग रहा था। इस समस्या के साथ साथ दूसरी बड़ी समस्या थी कि आयोग की ओर से जो अंतिम सूची का प्रकाशन किया गया था। उसमें सभी पंचायतों में 100 से 200 वोटरों का नाम अपने आप गायब था। यहां तक कि कुछ पंचायतों में यह स्थिति रही कि बड़े बड़े कुटुंब का नाम ही अपने आप गायब हो गया। गायब नाम न तो अपमार्जन की सूची में थे और न ही किसी अन्य सूची में। अपने आप गायब नाम के बारे में जवाब देने को कोई तैयार न था। जिसके चलते कई बार हंगामा भी हुआ।
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जिन कार्मिकों द्वारा मतदान सामग्री व्यवस्थित की गई। उनके द्वारा भारी लापरवाही बरती गई थी। इसी कारण जिला पंचायत के वार्ड नंबर चार के प्रत्याशियों की सूची वार्ड नंबर तीन में आ गई थी। जिसके चलते ग्राम पंचायत डोमाई व परसा में जिला पंचायत सदस्य प्रत्याशियों का कोई एजेंट नहीं बन पाया। जिसके चलते यहां चुनाव बिना एजेंटों के ही हुआ।
जमुनहा भवनियापुर के वार्ड नंबर सात से सदस्य ग्राम पंचायत पद पर चार लोगों का नामांकन हुआ था। चुनाव निशान का आवंटन भी हुआ। इसमें असगर अली को चुनाव चिह्न आम मिला। जबकि नफीस अहमद को ओखली, राम प्रसाद को अंगूर एवं रशीद अहमद को चुनाव चिह्न केला मिला था। चुनाव चिह्न आवंटन के बाद सभी अपना अपना प्रचार करते रहे। गुरुवार को जब मतदान के लिए बैलेट पेपर आया तो उसमें केवल तीन प्रत्याशी का ही चुनाव चिन्ह था। इस बैलेट पेपर से केला चुनाव निशान गायब था। जिसे देख मतदाता असमंजस में पड़ गए। जानकारी करने पर एसडीएम जमुनहा प्रवेंद्र कुमार ने बताया कि असगर अली का नामांकन खारिज हुआ है। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि जब नाम खारिज हुआ तो चुनाव चिह्न कैसे आवंटित हुआ।
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