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15 नवंबर तक हर हाल में पूरी कर लें आलू की बोआई

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श्रावस्ती। सब्जियों में आलू की खेती के इच्छुक किसान 15 नवंबर तक हर हाल में आलू की बोआई कर लें। साथ ही बेहतर पैदवार के लिए किसान अगैती प्रजाति के बीजों का चयन करें। आवश्यकता अनुरूप उर्वरक व कीटनाशक आदि का छिड़काव करें। जिससे किसानों को फायदा मिलेगा। ये बातें वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष कृषि विज्ञान केंद्र डॉ. आरपीएस रघुवंशी ने किसानों से कही। उन्होंने कहा कि आलू की खेती के लिए 15 नवंबर तक का समय बोआई के लिए सर्वोत्तम है।
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किसान मुख्य रूप से अगैती प्रजाति जैसे कुफरी चंद्रमुखी व कु फरी अशोका की बोआई करें। कुछ प्रजातियां ऐसी भी हैं, जो 100 से 120 दिन में तैयार होती हैं। इनमें कुफरी बादशाह, कुफरी लालिमा, कुफरी सिंदूरी, कुफरी जवाहर, कुफरी सत्यानंद सर्वोत्तम है। इसके लिए 25 से तीस कुंतल बीज कंद प्रति हेक्टेअर की दर से बोआई करें। इससे 70 से 90 कुंतल प्रति हेक्टअर तक की आलू की पैदावार होगी। कहा कि किसानों को चाहिए कि वह मृदा परीक्षण के उपरांत ही उर्वरक का प्रयोग करें। किसान एक हेक्टेअर खेत में 200 किलोग्राम नाइट्रोजन, 80 किलोग्राम फास्फोरस, 90 किलोग्राम पोटाश का प्रयोग करें।
एक बार में नाइट्रोजन की आधी मात्रा व फास्फोरस तथा पोटाश की पूरी मात्रा बोआई के समय डालें। बताया कि आलू को रोग व कीड़ों से बचाने के लिए नाइट्रोजन की बची आधी मात्रा को अंकुरण पूरा होने व दो तीन पत्ती आने के बाद डाल कर सिंचाई करें। आलू को अगैती झुलसा से बचाने के लिए मैनेकोजेड दो ग्राम दवा प्रति लीटर पानी में डाल कर छिड़काव करें, फायदा मिलेगा। किसान आलू बीज शोधन के लिए दो ग्राम बोरिक एसिड प्रति लीटर पानी की दर से घोल बना लें। यदि आलुओं का आकार बड़ा है तो पहले आलू का टुकड़ा करके उसमें डालें। इसे आधे घंटे तक घोल में रखना चाहिए। इसके पश्चात उसे निकाल कर छायादार स्थान पर सुखा लें, इसके बाद बोआई करे।
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