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लाखों खर्च के बाद दावेदार भ्रमित

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श्रावस्ती। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव आरक्षण की सूची जारी होने के बाद कई प्रत्याशियों ने लाखों रुपये होर्डिंग पोस्टर के नाम पर खर्च कर दिए। पुरानी सूची निरस्त होने के बाद नए फार्मूले पर आरक्षण की तैयारी जिले में चल रही है। वहीं अब लाखों रुपये चुनाव तैयारी के नाम पर खर्च करके प्रत्याशी असमंजस की स्थिति में हैं। वह यह नहीं तय कर पा रहे हैं कि पुरानी सीट को लेकर अपनी दावेदारी को जारी रखें या फिर नई सूची आने तक इंतजार करें।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले जारी आरक्षण सूची ने कइयों के मंसूबे पर पानी फेर दिया है। खास तौर से इसका असर जिला पंचायत सदस्य व प्रधान पदों को लेकर है। जिला पंचायत सदस्य पद का आरक्षण अपने अनुकूल पाते ही संभावित प्रत्याशियों ने पूरी आर्थिक ताकत के साथ मोर्चा खोल दिया था। चुनाव इस बार हाईटेक बनाने के लिए विधानसभा चुनाव की तर्ज पर गांव गली में प्रत्याशियों ने पोस्टर व घर-घर में कैलेंडर लगवाए थे। कुछ प्रत्याशियों ने तो वोटरों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए भंडारा भी चालू करा दिया था।
अनंतिम सूची जारी होने से अंतिम सूची जारी होने तक लोगों ने लाखों रुपये का वारान्यारा चुनाव के नाम पर कर दिया। लेकिन कोर्ट ने पुरानी सूची को निरस्त करते हुए नए फार्मूले पर आरक्षण कराने का आदेश जारी किया है। इसी के बाद अब स्थिति असमंजस की हो गई है। यह तय कर पाना मुश्किल हो गया है कि पुरानी आरक्षण सूची में जो जिस वर्ग के लिए आरक्षित था वह नई सूची में वैसा ही रहेगा या फिर फेेरबदल होगा। यदि आरक्षण विषयों के जानकारों की माने तो ग्राम प्रधान पद के लिए सबसे ज्यादा फेरबदल होगा। इसका असर जिला पंचायत पद पर भी दिखेगा। संभव है कि जो जिस वर्ग के लिए आरक्षित हो वह उस वर्ग के लिए न बचे।
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पंडालों से प्रत्याशियों की भीड़ हुई गायब
चुनाव चाहे त्रिस्तरीय हो या फिर विधानसभा क्षेत्र का। इस अवसर का लाभ आम जनता अपने-अपने तरीके से उठाने का प्रयत्न करती है। यही कारण है कि यदि जब-जब चुनाव आता है। तब-तब ग्रामीणों की ओर से धार्मिक आयोजनों को भी गति प्रदान कर दी जाती है। ऐसे में देखा जाए तो शायद ही कोई क्षेत्र हो जहां इस समय धार्मिक आयोजन न चल रहा हो। इस आयोजन में ग्रामीण सभी प्रत्याशियों को प्रमुख तौर पर आमंत्रित करते हैं। जिसका उद्देश्य धार्मिक जनजागरण के साथ ही आर्थिक सहयोग होता है। यही कारण है कि आरक्षण सूची आने के बाद प्रत्याशियों की धार्मिक पंडालों में उपस्थिति बढ़ गई। लेकिन सूची निरस्त होते ही अब तक मैदान में डटे अधिकांश प्रत्याशी मौन व्रत रखकर लापता हो गए।
प्रधान पद को लेकर लड़ाई ज्यादा
प्रधान पदों की संख्या जिले में 397 है। ऐसे में यदि किसी भी विकास खंड में एक भी पद की स्थित आरक्षण के रोस्टर में बदली तो पूरे विकास खंड का आरक्षण स्वत: बदल जाएगा। ऐसे में जो अभी तक मुखर होकर एक-दूसरे की लॉबिंग कर रहे थे। आरक्षण की स्थिति बदलने के बाद उनकी स्थिति सबसे ज्यादा हास्यप्रद हो जाएगी।
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