बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शुक्रवार को बौद्ध अनुयायियों से गुलजार रही। थाईलैंड से आए 150 सदस्यीय दल ने अपने रीति रिवाज से जेतवन परिसर में वर्षावास समापन पूजन किया। इस दौरान उन्हें धार्मिक उपदेश भी दिया गया। बाद में दल के सदस्यों ने तपोस्थली के विभिन्न मोमेंटों का भ्रमण भी किया।
बुद्ध ने चेतना के जिस शिखर को छुआ है, वैसा किसी और ने नहीं छुआ। बुद्ध ने अपना पूरा जीवन सत्य की खोज और निर्वाण को पा लेने में ही लगाया। उन्होंने मानव मनोविज्ञान और दुख के हर पहलू पर कहा और उसके समाधान भी बताए। यह रिकॉर्ड है कि बुद्ध ने जितना कहा और जितना समझाया उतना किसी और ने नहीं।
पूजन के उपरांत सभी उपासकों ने जेतवन, शिवली स्तूप, कौशांबी कुटी, सभामंडप, गंध कुटी, सूर्य कुंड, पूर्वा राम विहार, अंगुलिमाल स्तूप आदि का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त किया। इस मौके पर बौद्ध भिक्षु सुख सागर, नागलोक, ज्ञान सागर, नाग ज्योति, बुद्ध रत्न आदि मौजूद रहे।