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बौद्ध भिक्षु श्रद्धालोक महाथेरो ने सुनाया उपदेश

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वर्षावाष पूजन करते बौद्ध अनुयायी। - फोटो : SRAWASTI
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कटरा (श्रावस्ती)। अपना दीपक स्वयं बनो क्योंकि आकाश में पथ नहीं होता जो बाहर की तरफ दौड़ता है वह ज्ञान को उपलब्ध नहीं हो सकता। इसीलिये आप बुद्ध के मार्ग में ध्यान लगाओ। ये बातें सोमवार को विशेष वर्षावास पूजा के पांचवें दिन बौद्ध भिक्षु श्रद्धालोक महाथेरो ने कहीं।
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उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध आनंद की बात नहीं करते। वह कहते हैं कि दुख पैदा करने के आयोजन छोड़ दो। आनंद तो अपने आप हो जाएगा क्योंकि आनंद तो मनुष्य का स्वभाव ही है। आनंद तो है ही, उसे फिर से थोड़े ही पाना है। दुख न रहे तो आनंद तो स्वत: ही आ जाएगा। आनंद दुख को मिटाए बिना नहीं मिलता। आनंद की खोज में व्यक्ति दुख को भूल जाता है। दुख के रास्ते पर चलता है और आनंद की कामना करने लगता है।
बीमारी के कारण बने रहे तो स्वास्थ्य की कामना का कोई परिणाम नहीं होता। बुद्ध कहते हैं कि स्वास्थ्य पाना है तो बीमारियों के कारण ढूंढो और उन्हें हटाओ तभी स्वास्थ्य रहोगे। बुद्ध उपदेश की सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने कोई सीधा कारण नहीं बताया। इशारे किए और महत्वपूर्ण बात कही।
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अप्प दीपोभव अर्थात अपने दीपक स्वयं बनो। आकाशे च पदं नत्थि, समणों नत्थि बाहरे अर्थात आकाश में पथ नहीं होता और जो बाहर की तरफ दौड़ता है वह ज्ञान को उपलब्ध नहीं हो सकता। इसीलिये बुद्ध के मार्ग में ध्यान व होश पर सबसे अधिक जोर दो। ध्यान में जितनी निर्विचार की स्थिति आएगी, उतना ही आनंद स्पष्ट होने लगेगा।
बौद्ध भिक्षु देवेंद्र ने कहा कि श्रावस्ती में वर्षावास पूजा करने से समस्त दुखों का निवारण हो जाता है। इसलिए देश-विदेश के लोग अपने व विश्व कल्याण के लिए श्रावस्ती में वर्षावास की कठिन पूजा करने के लिए आते हैं। इस मौके पर धर्म सागर, आनंद सागर, नागलोक, इंद्रसेन, धर्मपाल सहित काफी संख्या में बौद्ध भिक्षु तथा अनुयायी मौजूद रहे।
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