श्रावस्ती। जिले में लगातार तीन दिन से हो रही बरसात अब बाढ़ का रूप ले चुकी है। राप्ती नदी विगत तीन दिनों से खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। राप्ती नदी जमुनहा सहित अन्य इलाकों में बुधवार को भी तबाही मचाए हुए है। बाढ़ के कारण खेतों में कटी पड़ी धान की फसल पानी में बह रही है। तीसरे दिन भी राप्ती का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है।
बुधवार दोपहर तीन बजे राप्ती बैराज पर नदी का जलस्तर 128.30 मीटर मापा गया, जबकि सुबह 10 बजे यह जलस्तर 128.15 मीटर था। इसका खामियाजा जमुनहा के नदी तट पर बसे गांव व खेतों में फसलों पर दिखाई पड़ रहा है। गंधवार गंगाभागड़, बेलरी, डेहरिया, मोहम्मदपुर, धर्मनगर, गाजोबारी, मोहनपुर, सुलतान जोत, चहलवा, लक्ष्मनपुर कोठी, नेवादा, शिकारी, सर्रा, जोगिया, टेपरा, वीरपुर लौकिहा, हंसनापुर, बरंगा, अशरफ नगर, लक्ष्मनपुर सेमरहनीय, हरिहरपुर करनपुर, संगमपुरवा, पोंदला, पोंदली, बेलरी, गंगाभागड, मुरावपुरवा, सहित कई अन्य गांवों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। यहां खेतों में पहले से कटी पड़ी फसल बाढ़ के पानी के साथ बह रही है। यही नहीं नदी में चारों तरफ कटी हुई फसल ही दिखाई दे रही है। बाढ़ के कारण आवागमन भी प्रभावित हुआ है।
कई पंचायतें ऐसी हैं जिनका संपर्क मुख्य मार्ग व दूसरे गांवों से कट चुका है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि जमुनहा क्षेत्र में लगभग 82 फीसदी धान की फसल बाढ़ व जलभराव से प्रभावित है। मालूम रहे कि जिले में धान की फसल लगाने के लिए सरकार की ओर से 75,500 हेक्टेअर का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके सापेक्ष जिले में 77,753 हेक्टेअर धान बोया गया। इसमें 56 प्रतिशत हाइब्रिड धान, तीन प्रतिशत बासमती व अन्य जबकि 41.7 प्रतिशत सामान्य प्रजाति का धान था। बाढ़ के पानी से भिनगा मल्हीपुर मार्ग पूरी तरीके से बंद है। ऐसे ही सर्रा, बीरबल कुटी, भंगहा के निकट मार्ग पर जलभराव होने से आवागमन बाधित है।
जिन क्षेत्रों में फसलें कट चुकी हैं। वहां जलभराव का सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। फिलहाल आगे मौसम साफ रहने की उम्मीद है। किसानों को चेतावनी दी जा रही है कि वह मौसम साफ होते ही फसल को ऊंचे स्थान पर डाल कर उसे सुखा लें, इससे नुकसान कम होगा।
डॉ. आरपीएस रघुवंशी, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष कृषि विज्ञान केंद्र श्रावस्ती।