कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती बुधवार को बुद्धम शरणम गच्छामि, धम्मम शरणम गच्छामि से गुंजायमान रही। अशोक धम्म विजय दशमी एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर के धर्मांतरण दिवस पर गुरुवार से दो दिवसीय मेले का आयोजन किया गया। जिसका शुभारंभ पंचशील ध्वजारोहण के साथ हुआ। इस दौरान तथागत भगवान बुद्ध के बताए मार्ग पर चल कर अपना जीवन धन्य करने को कहा गया।
बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती के पर्यटन मैदान में आयोजित मेले का शुभारंभ बौद्ध भिक्षु देवेंद्र महाथेरो, महाप्रजापति गौतमी भिक्षुणी ने पंचशील ध्वजारोहण करके किया। इस दौरान बौद्ध भिक्षु देवेंद्र ने कहा कि बौद्ध धर्म के संस्थापक तथागत गौतम बुद्ध के द्वारा बताए गए मार्ग दुखों के कारण और निवारण के लिए सर्वोत्तम है। बुद्ध धम्म संघ रूपी त्रिरत्न की शरण ग्रहण कर धम्म के अष्टांगिक मार्ग को सम्राट अशोक क्वार माह की शुक्ल पक्ष दशमी तिथि को बौद्ध धर्म अपनाकर धम्म में दीक्षित हुए थे। इसके कारण उनके राज्य में जनता सुख शांति से रह कर इतना समृद्ध हो गई थी कि भारत को दुनिया में सोने की चिड़िया कहा जाने लगा था। सम्राट अशोक को अशोक महान की पदवी मिली थी।
सम्राट कनिष्ट, सम्राट हर्षवर्धन, अनागारिक धम्म पाल तथा बोधिसत्व बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भी इसी तिथि को बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी। इन सभी महापुरुषों के बौद्ध धर्म की दीक्षा दिवस को अशोक धम्म विजयदशमी बौद्ध मेला समारोह के रूप में मनाया जाता है। कार्यक्रम के समापन पर मुख्य अतिथि सांसद राम शिरोमणि वर्मा नेे कहा कि आंधियों में भी दिवा का दीप चलना जिंदगी है, पत्थरों को तोड़कर निर्झर का निकलना जरूरी है...।
मनुष्य का जीवन लंबा नहीं अपितु महान होना चाहिए। यह गुण सम्राट अशोक में था। मेला अध्यक्ष कोरी सुभाष चंद्र लहरी ने कहा कि इस अवसर पर यहां आने वालों को तथागत भगवान बुद्ध के बताए मार्ग पर चल कर अपना जीवन धन्य करना चाहिए। कार्यक्रम में बलरामपुर के पूर्व विधायक जगराम पासवान, राम भजन, अशोक शाक्य, श्यामू मौर्य, आनंद मौर्य, शिवकुमार मौर्य, पवन कुमार सिंह बौद्ध सहित गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, मऊ, देवरिया, बलिया, आजमगढ़, लखनऊ सहित अन्य जिलों के बौद्ध अनुयायी मौजूद रहे।