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फाइलों में उलझ गई श्रावस्ती रेल लाइन

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श्रावस्ती। श्रावस्ती में रेल लाइन का सपना फाइलों में उलझ कर रह गया है। एक जन सूचना के जवाब में पूर्वोत्तर रेलवे ने कहा कि घोषणा के बाद उसे पर्याप्त पैसा नहीं मिला। इसलिए लागत बढ़ गई है। पैसा मिलने के बाद ही प्रगति की बात कही गई है।
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प्रदेश में श्रावस्ती ही एक ऐसा जिला है, जिसका कोई भी हिस्सा रेल लाइन को नहीं जुड़ा है। यहां के लोगों को रेलवे सुविधा पाने के लिए बहराइच या फिर बलरामपुर जाना पड़ता है। इस मांग को वैसे तो समय-समय पर कई बार उठाया गया, लेकिन वर्ष 2014 में श्रावस्ती को रेल से जोड़ने के संघर्ष समिति का गठन हुआ। समिति के पदाधिकारियों ने भिनगा से लेकर दिल्ली के जंतर मंतर तक इसके लिए आंदोलन किया। पूर्व सांसद दद्दन मिश्र के नेतृत्व में समिति के पदाधिकारियों ने अपनी इस मांग को लेकर संघर्ष किया। इनकी इस मांग पर 2018 के केंद्रीय बजट में खलीलाबाद-बहराइच वाया भिनगा रेलवे लाइन को मंजूरी देते हुए रेल लाइन सर्वे सहित भूमि अधिग्रहण के लिए बजट जारी किया गया। इसके बाद 2019 में रेल मंत्रालय ने श्रावस्ती व बहराइच के डीएम को पत्र लिख कर सेटेलाइट सर्वे के आधार पर चिह्नित भूमि का ग्राम पंचायत वार नक्शा मांगा था, जिससे भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आरंभ हो सके।
इस पत्र के बाद प्रशासन ने नक्शा उपलब्ध करवा दिया, लेकिन रेल मंत्रालय की ओर से यह परियोजना अधर में ही लटकी रही। रेलवे लाइन प्रोजेक्ट पर हो रही लेट लतीफी पर जब जन सूचना मांगी गई तो उप मुख्य इंजीनियर नियोजन एवं अभियंत्रण पूर्वोत्तर रेलवे ने जवाब देते हुए लिखा कि वर्ष 2018 में भू अधिग्रहण के लिए पर्याप्त पैसा नहीं मिला। जिसके कारण भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया धीमी रही। इसके बाद के दिनों में पैसे का अभाव रहा। 2021-22 में उन्हें भू अधिग्रहण के लिए बीस करोड़ रुपये मिले हैं। 80 करोड़ रुपये और मांगे गए हैं। चूंकि इन तीन वर्ष में लागत बढ़ गई। यह पैसा मिलने पर अधिग्रहण प्रकिया पूरी हो पाएगी।
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वर्ष रुपये
2018-19 10 करोड़
2019-20 10 करोड़
2020-21 ं .0001 करोड़
2021-22 20 करोड़
जिले को रेलवे लाइन से जोड़ने का वादा अभी पूर्ण होने की उम्मीद नहीं है। पिछले साल के बजट की ही तरह इस बार भी बजट में खलीलाबाद, बहराइच वाया भिनगा रेल लाइन को अमली जामा पहनाने के लिए पैसा नहीं मिला। इससे आम लोगों में नाराजगी है। बलरामपुर लोकसभा क्षेत्र से पहली बार सांसद चुने गए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने बलरामपुर के तुलसीपुर से सिरसिया, नानपारा होते हुए लखीमपुर खीरी से पीलीभीत तक नई रेल लाइन बिछाने की मांग सदन में की थी। प्रधानमंत्री बनने के बाद अटल बिहारी बाजपेयी ने इंडोडच नेपाल लाइन बिछाने के लिए सर्वे भी करवाया था। हालांकि योजना को अमली जामा नहीं पहनाया जा सका।
अटल बिहारी बाजपेयी के अलावा नाना जी देशमुख व एसआर किदवई ने भी रेल लाइन बिछवाने की मांग की थी। पूर्व सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान ने भी बुढ़वल से कैसरगंज, जरवल, बहराइच व भिनगा होते हुए तुलसीपुर तक रेल लाइन बिछाने के लिए सदन में कई बार आवाज बुलंद की। हालांकि इस मामले में कोई सफलता नहीं मिल पाई। इसके बाद पूर्व सांसद डॉ. विनय कुमार पांडेय की मांग पर 10 मई 2013 को कांग्रेस की राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बहराइच से गिलौला, इकौना भिनगा व बलरामपुर के लिए रेल लाइन निर्माण शुरू कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन यह आश्वासन कभी भी जमीन पर नहीं उतर सका।
खलीलाबाद-बहराइच बाया श्रावस्ती रेलवे लाइन के लिए अथक प्रयास किया गया है, लेकिन इस प्रोजेक्ट पर अभी तक पर्याप्त बजट न मिलने पर सूचना निराशाजनक है। इसके लिए पुन: रेल मंत्री व बोर्ड चेयरमैन से मिल कर अपनी समस्या रखी जाएगी।
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दद्दन मिश्रा पूर्व सांसद
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