नोमेस लैंड स्थित पिलर संख्या 641 की ओर बढ़ती राप्ती नदी व जांच करते अधिकारी
- फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। राप्ती नदी नोमेंस लैंड की ओर लगातार कटान करते हुए बढ़ रही है। इसके चलते सीमा स्तंभ का अस्तित्व संकट में आ गया है। वहीं सीमा स्तंभ के नीचे हुए अवैध मिट्टी खनन के चलते भी नोमेंस लैंड को क्षति पहुंचने की संभावना है। मामले में शिकायत के बाद एसएसबी अधिकारियों के साथ एसडीएम ने मौके पर जांच की।
राप्ती नदी में कुछ दिन पूर्व बढ़े जल स्तर के बाद स्थिति सामान्य हो गई। जलस्तर भी घट कर नीचे आ गया है। इसी के साथ नदी द्वारा कटान की जा रही है। कुछ दिनों के अंदर ही नदी का रुख नोमेंस लैंड की ओर हो गया। नदी धीरे धीरे भारत नेपाल सीमा स्तंभ संख्या 641 की ओर बढ़ रही है। अभी सीमा स्तंभ से नदी की दूरी एक छोर से लगभग 100 मीटर तो दूसरे छोर से 50 मीटर ही बची है। ऐसे में माना जा रहा है कि यदि नदी का रुख और भी तीव्र हुआ तो नदी सीमा स्तंभ के पास तक पहुंच सकती है। जिसके चलते इस सीमा स्तंभ का अस्तित्व मिट सकता है। वहीं इस मामले में स्थानीय लोगों ने डीएम को सूचना देकर सीमा स्तंभ की ओर बढ़ रही राप्ती की जलधारा को डायवर्ट करने की मांग की तो डीएम ने एसडीएम जमुनहा प्रवेंद्र कुमार को मामले की जांच करने का आदेश दिया था। इस पर एसडीएम ने एसएसबी व पुलिस के साथ सीमा स्तंभ की ओर होने वाले कटान का जायजा लिया।
भारत नेपाल सीमा स्तंभ संख्या 641 एक मिट्टी के टीले पर स्थित है। इस टीले के नीचे आसपास के लोगों द्वारा अवैध खनन करके मिट्टी चुराई जा रही है। जिससे पिलर के नीचे मिट्टी समाप्त होने को है। ऐसी स्थिति में राप्ती जैसे जैसे नोमेंस लैंड की ओर बढ़ रही है। वैसे वैसे सीमा स्तंभ के अस्तित्व को लेकर भी प्रश्र उठने लगा है। राप्ती नदी में आई बाढ़ के कारण बरगदहा के मजरा रामपुर घाट के उत्तर दिशा में स्थित उप सीमा स्तंभ 642/1 को राप्ती नदी ने जून माह में काट कर अपनी धारा में विलीन कर लिया था। इसी के बाद मुख्य सीमा स्तंभ को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।