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बढ़नी-काठमांडू रेल परियोजना की फिर उठी मांग

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रेल मंत्री को बढनी काठमांडू रेल सेवा का प्रस्ताव सौंपते पूर्व सांसद दद्दन मिश्र फाइल फोटो - फोटो : SRAWASTI
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श्रावस्ती। भारत व नेपाल के संबंधों को एक मुकाम देने के लिए बढ़नी से काठमांडू तक रेल सेवा प्रारंभ करने का प्रस्ताव तीन वर्ष पहले रेलवे को भेजा गया था। यह प्रस्ताव भारत नेपाल मैत्री रेल सेवा के विस्तार का था। यह सेवा खलीलाबाद बहराइच वाया भिनगा रेल लाइन से कनेक्ट करने का था। तीन वर्ष पूर्व श्रावस्ती लोकसभा के सांसद रहे दद्दन मिश्र व सांसद जगदंबिका पाल ने संयुक्त रूप से भारत नेपाल मैत्री रेल सेवा के विस्तार का एक प्रस्ताव देते हुए बढ़नी से काठमांडू तक रेल लाइन बिछाने की मांग की थी। प्रस्ताव के तहत खलीलाबाद बहराइच वाया भिनगा रेलवे लाइन को बहराइच से भिनगा गिलौला, इकौना होते हुए बलरामपुर से जोड़ा जाना है।
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इस परियोजना को तो मंजूरी मिल गई थी। लेकिन भारत नेपाल मैत्री रेल सेवा के तहत दिया गया बढ़नी से काठमांडू का प्रस्ताव अभी विचाराधीन है। इसी बीच रक्सौल (बिहार) से काठमांडू को इलेक्ट्रिक रेलवे लाइन से जोड़ने की दोनों देशों के बीच हुई सहमति ने इस प्रस्ताव को एक बार फिर से जमीन पर उतारने की मांग तेज कर दी है। मालूम रहे कि बढ़नी एक व्यापारिक केंद्र है। जो भारत नेपाल के बीच की आवश्यकताओं को पूरा करता है। यह पूर्वांचल से नेपाल को जोड़ने व नेपाल से पूर्वांचल सहित दिल्ली को जोड़ने का एक सबसे नजदीकी रास्ता है। इसका लाभ मालवाहक के रूप में तो होगा ही, दोनों देशों के लोगों को आने जाने में सुविधा मिलेगी।
वर्ष 1937 में अंग्रेजों ने भारत से नेपाल को एक नैरो गेज लाइन से जोड़ा था। इसका इस्तेमाल सामान की ढुलाई व यात्रियों को लाने व ले जाने के लिए किया जाता था। बाद में इस लाइन को ब्राडगेज किया गया। पूर्व सांसद और जिला पंचायत अध्यक्ष दद्दन मिश्रा ने बताया कि मैंने व जगदंबिका पाल ने रेलमंत्री व प्रधानमंत्री से मिल कर बढ़नी-काठमांडू रेल सेवा का प्रस्ताव दिया था। अभी दो माह पूर्व रेलवे बोर्ड चेयरमैन से मिल कर इस प्रस्ताव को गति देने की मांग रखी थी। अभी प्रस्ताव रेत्र मंत्रालय में विचाराधीन है।
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