श्रावस्ती। विश्व पर्यावरण दिवस पर रविवार को सिरसिया के जुड़पनिया में पिरामिल संस्था की ओर से गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।
इस दौरान पर्यावरण पर अपने विचार रखते हुए संस्था की रचना ने कहा कि आज हम लोग पर्यावरण दिवस के मौके पर प्रतिज्ञा लें कि पर्यावरण में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रदूषण नहीं करेंगे। भूमि पर्यावरण का अभिन्न अंग है। भूमि का अवैध खनन व जलश्रोतों के अंधाधुंध दोहन से पर्यावरण पर दुष्प्रभाव पड़ता है। जल प्रदूषित होनेसे जल में विषैले रसायन तांबा, सीसा, बेरियम फास्फेट की मात्रा बढ़ जाती है। ऐसे जल का सेवन करने से कैंसर व पेट संबंधी रोग उत्पन्न हो जाते हैं। इसको रोकने के लिए आम जनमानस को प्रशासन का सहयोग करना चाहिए।
इसके साथ ही लोगों को यह मात्र दिवस के रूप में न मनाकर एक अभियान के रूप में मनाना चाहिए। वहीं तन्वी ने कहा कि पेड़ों के संरक्षण की सख्त जरूरत है। इसमें सबसे अधिक संरक्षण पुराने फलदार वृक्षों को दिया जाना चाहिए। अगर पुराने आम के वृक्षों को नहीं बचाया तो आगे की पीढ़ी असली देशी आमों का स्वाद नहीं जान पाएगी। पर्यावरण को शुद्ध रखने के लिए प्रत्येक परिवार के सभी सदस्य को वृक्षारोपण करना चाहिए। अन्यथा मानव जाति ग्लोबल वार्मिंग के प्रकोप को सह नहीं पाएगी।
कंपोस्ट खाद पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लगातार रासायनिक उर्वरक का प्रयोग करने से मृदा में असंतुलन फैलता है। इससे बचने के लिए कंपोस्ट खाद एवं हरित खादों का प्रयोग किया जाए। वृक्षों में विषैले पदार्थों तथा धूल कणों को अवशोषित करने की अपार क्षमता होती है। पर्यावरण संरक्षण में वृक्षों का प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से विशेष योगदान है। इस दौरान यहां मेंहदी, स्लोगन व निबंध प्रतियोगिताएं भी कराई गईं। जिसके माध्यम से ग्रामीणों व महिलाओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।