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एक बोरी यूरिया के लिए नौ घंटे की कतार

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श्रावस्ती। यूरिया की जिले में भारी किल्लत है। केवल कुछ ही साधन सहकारी समितियों पर शनिवार को यूरिया उपलब्ध रही। एक बोरी यूरिया के लिए किसानों को नौ घंटे कतार में खड़ा होना पड़ रहा है। इसके बाद भी जब तक उनका नंबर आता तब तक यूरिया खत्म हो जाने की बात कही जा रही है। जिसके चलते किसानों के सामने भारी समस्या खड़ी हो रही है।
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धान की फसल इस समय उस मोड़ पर आ कर खड़ी हो गई है, जब उसे यूरिया की सख्त जरूरत है। यदि एक सप्ताह के अंदर फसल को यूरिया नहीं मिली तो उत्पादकता प्रभावित होगी। इसीलिए किसान किसी भी हालत में और किसी भी दर पर यूरिया खरीदने के लिए समितियों और दुकानों के चक्कर लगा रहा हे। जिले में यूरिया की किल्लत बनी हुई है।
जिले की दस साधन सहकारी समिति पर शनिवार को यूरिया थी। जिसके लिए किसानों की लंबी कतारें शनिवार सुबह चार बजे से लग गई। लॉकडाउन होने के बाद भी किसान मजबूरी में दो से ढाई किलोमीटर लंबी कतार में खड़े हो गए। किसानों को कहीं प्रति व्यक्ति एक बोरी तो कहीं दो बोरी खाद दिया जा रहा है। ऐसे में एक बोरी खाद के लिए लोगों को नौ-नौ घंटे कतार में खड़ा होना पड़ा।
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ऐसी स्थिति लक्ष्मनपुर बाजार व हरिहरपुरानी विकास खंड के अकबरपुर साधन सहकारी समिति पर देखने को मिली। जहां किसानों की बड़ी लाइन लगी थी। यही स्थिति उन साधन सहकारी समितियों की भी थी जहां शनिवार को यूरिया मौजूद रही।
लाइन लगाने के साथ झेल रही पुलिस की प्रताड़ना
किसानों जहां खाद के लिए सहकारी समितियों व दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं। वहीं जहां खाद मिल भी रही है वहां लंबी लाइन लगाने के साथ ही पुलिस की प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। किसी भी प्रकार के विरोध पर उन्हें पुलिस की लाठी भी खानी पड़ रही है। कतार में लगने के दौरान उन्हें कोरोना संक्रमण का भी खतरा सता रहा है। इसके बाद भी उन्हें अपने रकबे के हिसाब से खाद नहीं मिल पा रही है।
कोरोना पर भारी खेती की चिंता
शनिवार व रविवार को सरकार की ओर से लॉकडाउन घोषित किया गया है। इस दौरान मास्क की अनिवार्यता भी है। इसकी जानकारी किसानों को भी है। खेती की चिंता उन्हें कोरोना जैसे महामारी से भी लड़ने के लिए मजबूर कर रही है। यही कारण है कि शनिवार को जहां जहां खाद उपलब्ध थी वहा बिना सामाजिक दूरी के किसान बिना मास्क के लाइन लगाए देखे गए।
जिले में खाद का आवंटन है। साधन सहकारी समितियां व निजी दुकानें उठान कर रही है। एक साथ सभी किसानों को खाद की जरूरत है। जिसेे चलते भीड़ बढ़ी है। किसान परेशान न हो खाद सभी को समय पर खाद मिलेगी। - आरपी राना, उप कृषि निदेशक
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