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स्वस्थ शरीर में ही स्वच्छ मस्तिष्क का होता निवास

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श्रावस्ती। आज के समय में बेटियां नाम रोशन कर रही हैं। जरूरत है उन्हें बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य व खुला आसमान देने की। इसके लिए समाज के सभी वर्गों को जागरूक होना होगा। महिलाएं सशक्त होंगी तो देश भी मजबूत होगा। इस लिए सभी को महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत हैं। यह बातें रविवार को अमर उजाला की मुहिम अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जमुनहा में महिला सुरक्षा व स्वास्थ्य पर आयोजित परिचर्चा में पीएचसी प्रभारी ने कहीं।
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इस दौरान महिलाओं की सुरक्षा व स्वास्थ्य को लेकर चर्चा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पीएचसी प्रभारी ने महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वच्छ मस्तिष्क का निवास होता है। आप जो भी करें उसे ठीक से करें। कॅरिअर के साथ परिवार को भी प्राथमिकताएं दें। महिलाएं तभी सशक्त होंगी जब वह शिक्षा व रोजगार पर विशेष ध्यान देंगी। आज महिलाओं की सुरक्षा के साथ आत्मनिर्भरता की भी जरूरत है।

माता-पिता व समाज को चाहिए कि वह बेटियों को खुला आसमान दें। इससे जहां वह शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रहेंगी, वहीं शिक्षा के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएंगी। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन निवास करता है। जब शरीर स्वस्थ रहेगा तो मन व मस्तिष्क स्वस्थ बनेगा। इसलिए बालिकाओं के स्वास्थ्य व शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए। - डॉ. सुमन थापा, पीएचसी प्रभारी
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बेटियों के जीवन में शिक्षा व स्वास्थ्य दोनों ही आवश्यक हैं। इसलिए दोनों को ही महत्व देना चाहिए। एक के चक्कर में दूसरे को नजर अंदाज करने से परेशानी बढ़ सकती है। किशोरियों को चाहिए कि वह शिक्षा से संबंधित परेशानियों को दूर करने के लिए शिक्षकों का सहारा लें, जबकि शारीरिक व मानसिक परेशानी से बचने के लिए परिवारीजनों व चिकित्सकों की राय लें। - डॉ. दीपिका

बेटियां अभिशाप नहीं है। आज बेटियां भी अपने माता-पिता, क्षेत्र व देश प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं। बेटियों को निरोगी व शिक्षित बनाने में कोई कोताही न बरती जाए। - पान कली

लोग बेटियों की अपेक्षा बेटों को अधिक महत्व देते हैं। उनकी गलतियों को नजर अंदाज करते हैं। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। बेटा व बेटी समान प्यार व दुलार के अधिकारी हैं। - सुषमा मिश्रा

बेटियों को चहारदीवारी में कैद करना, उनकी प्रतिभा का गला घोटना है। बेटियों को भी खुला आसमान मिले। जिससे वह भी हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का उपयोग कर सकें। - कुमकुम वर्मा

अच्छे समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है कि देश की आधी आबादी मानी जाने वाली महिलाओं व बच्चियों को भी समाज में भागीदारी के लिए समान मौका दिया जाए। - संध्या

प्रत्येक माता पिता को चाहिए कि वह अपने सभी बेटे व बेटियों को का टीकाकरण करवाएं। इसके साथ ही उन्हें नियमित विद्यालय भेजें तथा उनका समान ख्याल भी रखें। - माधुरी

बेटी व बेटा में अब फर्क नहीं रहा। तमाम ऐसी बेटियां हैं जो बेटों का हक अदा कर रही हैं। माता पिता का नाम रोशन कर रही हैं। ऐसे में बेटियों का ख्याल रखा जाए। - पुष्पा देवी

केंद्र व प्रदेश सरकार बेटियों को आगे बढ़ने के लिए तमाम योजनाएं चला रही है। माता पिता को चाहिए कि वह इन योजनाओं का लाभ लें। बेटियों को आगे बढ़ाने में मदद करें। - नीलम देवी

स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर हमें चिकित्सक की राय लेनी चाहिए। बीमारियों को नजर अंदाज करना घातक हो सकता है। सुबह जल्दी उठ कर खुली हवा में घूमना चाहिए। - धर्मराज

विद्यालय में छात्राओं को प्रतियोगिता में प्रतिभाग करना चाहिए। इससे उनका मस्तिष्क व शारीरिक विकास होगा। माता-पिता बेटियों की शिक्षा व सेहत पर विशेष ध्यान दें। - चंद्र प्रकाश यादव
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