फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ऐन मौके पर दगा दे गई एसओ की सर्विस रिवाल्वर!

Sat, 15 Jun 2013 08:04 PM IST
चित्रकूट/अवध नरेश त्रिपाठी
विज्ञापन
विज्ञापन
बदमाशों से जूझ रहे इलाहाबाद के बारा थाना प्रभारी के फोन पर सूचना देने के बाद एक तो समय से फोर्स मौके पर नहीं पहुंची, दूसरे उनकी सर्विस रिवाल्वर ऐन मौके पर दगा दे गई, जिससे वह शहीद हो गए।
विज्ञापन


घटना स्थल पर एक जिंदा कारतूस जमीन पर, दूसरा उनके सर्विस रिवाल्वर में फंसा हुआ पाया गया।

आईजी आलोक शर्मा के मुताबिक एसओ की बदमाशों से मुठभेड़ हुई थी। उन्होंने अपनी पिस्टल से दो गोलियां चलाई थीं।

पढ़ें: इलाहाबाद में थानेदार की गोली मारकर हत्या

इलाहाबाद के शंकरगढ़ थानाक्षेत्र में शुक्रवार को शहीद हुए बारा के थाना प्रभारी राजेश प्रसाद द्विवेदी मूल रूप से जिला सुल्तानपुर के गांव विजेथुवा कादीपुर निवासी देवी शरण द्विवेदी केबेटे थे। वह (39) 2001 बैच के दारोगा थे।

पढ़ें: यूपीः खाकी पर भारी पड़ते अपराधी

घटना के समय उनकी पत्नी राजरेखा और दो बच्चे कालिंदीपुरम स्थित उनके आवास पर थे। हत्या की खबर से घर में कोहराम मच गया। सूचना मिलने के बाद इलाहाबाद शहर केस्वरूपरानी नेहरू अस्पताल पहुंचे परिजनों को बिलखते देख एडीजी (कानून व्यवस्था) अरुण कुमार और आईजी आलोक शर्मा देर तक ढांढस बंधाते रहे।
विज्ञापन


पढ़ें: थानेदार हत्याकांड: कौन देगा इन सवालों के जवाब?

मऊ तहसील मुख्यालय से लगभग बीस किमी दूर जिले का अंतिम गांव है मुरका। यहीं से शंकरगढ़ (इलाहाबाद) के गांव कट्टई की सीमा शुरू हो जाती है। गांव हरई के पोल्ट्री फार्म के पास बारा थाना प्रभारी को बदमाशों ने गोली से उड़ाया। छानबीन में पता चला है कि थाना प्रभारी से फोन पर सूचना मिलने के बाद अगर समय पर शंकरगढ़ और बारा थाने की फोर्स मौके पर पहुंच जाती तो वह बदमाशों की गोली के शिकार नहीं होते।

लालापुर पीएचसी में तैनात डॉ. भीमसेन सिंह मऊ के द्विवेदी नर्सिंग होम में भी बैठते हैं। वह रोजाना मऊ से नैनी आते-जाते हैं। तीस मई की शाम वह अपनी इंडिगो कार से नैनी जा रहे थे। बारा थाने के सेउड़ा नहर के पास तीन बदमाशों ने तमंचा लगाकर उनकी कार लूट ली थी। इसकी रिपोर्ट उन्होंने बारा थाने में लिखाई थी।

शुक्रवार को मऊ के एक मैकेनिक इम्त्याज ने इलाहाबाद जाते समय पेट्रोल पंप पर इस कार को खड़े देखा तो उसने डॉक्टर भीमसेन सिंह को फोन कर दिया। डॉक्टर ने भी तुरंत इसकी जानकारी बारा थानाध्यक्ष को दे दी। एसओ अपनी वैगनआर से पेट्रोल पंप पहुंच गए। वहां पर जब पंपकर्मियों ने बताया कि कार तो जा चुकी है तो वह हाईवे पर मऊ की ओर चल पड़े।

घटनास्थल के निकट काम कर रहे मजदूर भइयालाल ने बताया कि सादी वर्दी में एसओ जब बदमाशों के पास पहुंचे तो उनकी छीना-झपटी भी हुई। फोर्स के पहुंचने पर मौके से एक कारतूस जिंदा, दूसरा एसओ की सर्विस रिवाल्वर में फंसा हुआ मिला।

ऐसे में माना जा रहा है कि एसओ ने भी रिवाल्वर चलाने की कोशिश की पर फायर नहीं हो सका। घटनास्थल पर लोगों में यह चर्चा थी कि अगर समय पर फोर्स पहुंच जाती या फिर रिवाल्वर चल जाता तो शायद एसओ शहीद नहीं होते।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें