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तुम मुझे वोट दो, मैं तुम्हे खेल का मैदान दूंगा

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थानाभवन। इस साल होने वाले पंचायत चुनाव में दावेदारों का ध्यान अपने गांव क्षेत्र के युवा वोटरों पर है। प्रत्याशी चाहते हैं कि युवा वोटर ना सिर्फ उनका समर्थन करें बल्कि जन-जन तक उनकी बात को पहुंचाएं। इसके बदले दावेदार जीत के बाद उन्हें खेल मैदान, खेल सामग्री, जिम आदि सुविधाएं मुहैया कराने का आश्वासन दे रहे हैं। आए दिन हर दावेदार युवा वोटरों को लुभाने के लिए नई योजना सामने लेकर आ रहा है।
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जैसे-जैसे पंचायत चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे दावेदारों के दिल की धड़कन भी तेज होने लगी है। दावेदार हर हथकंडा अपनाते हुए वोटरों को अपने पक्ष में करने प्रयास कर रहे हैं। दावेदारों ने युवाओं पर डोरे डालने शुरू कर दिए हैं। प्रत्याशियों की इस तैयारी के बाद युवा वोटर भी पीछे रहने के मूड में नहीं है। जिन गांव में युवा खेल सुविधाएं चाहते हैं, वह अपने पसंद के प्रत्याशी से उस सामग्री व संसाधनों की मांग कर रहे हैं। आगामी पंचायत चुनाव में कौन प्रत्याशी वोटरों को अपने पक्ष में खींच पाता है और कौन युवा वोटरों की उम्मीदों पर कायम रह पाता यह आने वाला चुनाव ही बताए।
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प्रत्याशियों के खास एजेंडे
ग्राम प्रधान बनने के बाद युवा साथियों के लिए क्रिकेट खेलने को मैदान
प्रधान बनते ही गांव में जिम की मुफ्त सुविधा।
प्रधान बनने के बाद पुलिस और आर्मी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एथलेटिक्स ट्रैक।
प्रधान बनने पर पांच साल के लिए 20 बीघा भूमि पर क्रिकेट ग्राउंड और दौड़ने का ट्रैक।
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बोले युवा...
हसनपुर लुहारी गांव में पिछले कई सालों से खेल का मैदान नहीं है। गांव के युवा और प्रतिभाशाली लड़कों को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल रहा। इसलिए युवा गांव में खेल सुविधाएं मुहैया कराने वाले लोगों का समर्थन करेंगे। - राहुल धीमान
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पूर्व में भी गांव के युवा खेल के मैदान की जनप्रतिनिधियों से मांग कर चुके हैं, लेकिन अभी तक इस मांग को अनसुना किया गया है। गांव में खेल मैदान एवं खेल सुविधाएं बेहद जरूरी है। ग्राम पंचायत को खेल सुविधाओं के बारे में सोचना चाहिए। - विशांत सैनी
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यदि गांव में खेल का मैदान होता तो निश्चित रूप से कई खिलाड़ी ऊपर तक नाम कमाते, जिससे गांव सहित पूरे क्षेत्र का मान बढ़ता, लेकिन गांव में खेल का मैदान न होने के कारण यहां की प्रतिमा है गांव में ही दबकर रह जाती हैं। - हनी कुमार
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इतने बड़े गांव में भी खेल का मैदान में होने के कारण यहां के लड़कों को दूसरे गांव में जाकर क्रिकेट खेलना पड़ता है। इस बार गांव के सभी युवाओं ने फैसला लिया है कि जो दावेदार गांव में खेल मैदान के लिए भूमि उपलब्ध कराएगा उसी का समर्थन किया जाएगा। - सागर सैनी
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