शामली। जिले की तीनों तहसीलों में शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में जनसमस्याओं की भरमार रही। कैराना, शामली और ऊन तहसील में कुल 112 शिकायतें अधिकारियों के समक्ष पहुंचीं। इनमें से केवल नौ शिकायतों का मौके पर निस्तारण किया जा सका। इस दौरान कई फरियादियों ने वर्षों से लंबित समस्याओं को अधिकारियों के सामने रखते हुए जल्द समाधान की मांग की।
तहसील कैराना सभागार में जिलाधिकारी आलोक यादव ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप जनसमस्याओं का त्वरित और पारदर्शी समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए तथा मौके पर जाकर जांच कर गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाए। कैराना तहसील में कुल 38 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से तीन का मौके पर निस्तारण किया गया।
इस दौरान एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह, एसडीएम कैराना शिवाजी यादव, सीएमओ डॉ. अनिल कुमार, पीडी डीआरडीए प्रेमचंद, तहसीलदार कैराना सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
उधर, तहसील शामली में मुख्य विकास अधिकारी बृजेंद्र शुक्ल के समक्ष 42 शिकायतें आईं। इनमें से तीन शिकायतों का मौके पर निस्तारण किया गया। तहसील ऊन में एडीएम सत्येंद्र सिंह के समक्ष 32 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें से तीन शिकायतों का मौके पर निस्तारण किया गया।
वर्षों से समाधान का इंतजार कर रहे फरियादी
गांव पावटी कला निवासी नाथीराम ने बताया कि पड़ोसी ने उसके खेत की मेढ़ काटकर भूमि पर अवैध रूप से सीमेंट के पिलर लगा दिए हैं। विरोध करने पर धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने बताया कि वह करीब एक वर्ष से शिकायत कर रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
मोहल्ला आलकला निवासी उधम सिंह पत्नी के साथ समाधान दिवस में पहुंचे। उन्होंने बताया कि ब्लॉक कॉलोनी के पास 50 गज के प्लॉट का 3.70 लाख रुपये में सौदा किया था और दो लाख रुपये अग्रिम भी दे दिए थे, लेकिन आरोपियों ने उन्हें फर्जी कागजात दे दिए। जब उन्होंने शेष रकम देकर बैनामा कराने की बात कही तो उन्हें धमकाया गया।
गोगवान निवासी आमिर अली ने गांव के मुख्य मार्ग पर नालियों का निर्माण न होने से होने वाले जलभराव की समस्या उठाई। उन्होंने बताया कि कई वर्षों से शिकायत करने के बावजूद गांव में गंदगी और जलभराव की समस्या बनी हुई है।
मोहल्ला आलकला निवासी मरदान ने बताया कि सार्वजनिक भूमि का उपयोग वह और अन्य लोग करीब 40 वर्षों से अपने ऊंट आदि बांधने के लिए करते आ रहे हैं। उनका आरोप है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद नगर पालिका वहां निर्माण कार्य करा रही है।