-कागजों में चल रहीं बाढ़ चौकियां, धरातल पर कहीं नहीं दिखा असर
-यमुना का रुख बदलने से कई गांवों पर मंडराया बाढ़ का खतरा
-किसानों की फसलें डूबीं, कर्ज और ब्याज तले दबे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली/कैराना/झिंझाना। यमुना नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर से चौसाना क्षेत्र के कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। हरियाणा की ओर बहने वाली यमुना अब उत्तर प्रदेश की ओर मुड़ गई है, जिससे खेतों में कटान बढ़ रहा है। हजारों बीघा फसलें डूब चुकी हैं। किसानों पर आर्थिक संकट टूट पड़ा है। वहीं प्रशासन के दावे केवल कागजों में सीमित दिखाई दे रहे हैं। बाढ़ चौकियां भी कागजों में चल रही हैं। जिलाधिकारी ने मामले की जांच कराने की बात कही है।
पहाड़ों और मैदानी इलाकों में बारिश से हथिनीकुंड बैराज पर जलस्तर बढ़ा। सोमवार को बैराज से 3.29 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिससे मंगलवार और बुधवार को यमुना का जलस्तर 232 मीटर तक पहुंच गया। वहीं खतरे का निशान 231.50 मीटर है। बृहस्पतिवार को भी जलस्तर 231.40 मीटर पर रहा, जो खतरे के निशान पर है।
-भडी गांव में ठोकर टूटी, संकट गहराया
भडी गांव के पास एक नंबर ठोकर टूटने से उपजाऊ जमीन यमुना में समा रही है। इसके चलते पुरानी भडी, भडी कोरियान, नाई नंगला और उद्पुर गांव खतरे की जद में हैं। किसान सरफराज ने चेताया कि यदि यह ठोकर पूरी तरह ध्वस्त हो गई तो भारी तबाही होगी।
-बाढ़ चौकियां सिर्फ कागजों में
कैराना। कैराना तहसील में यमुना में आने वाली बाढ़ से सुरक्षा के लिए तहसील प्रशासन द्वारा 4 बाढ़ चौकी बनाई गई हैं, लेकिन चारों बाढ़ चौकी केवल नाम से ही जानी जाती हैं। किसी भी बाढ़ चौकी का कोई आफिस मौजूद नहीं है। राजस्व निरीक्षक अरुण कुमार ने बताया कि तहसील में फतेहपुर, इस्सोपुर खुरगान, रामडा व डुंडुखेड़ा बाढ़ चौकी हैं। पड़ताल के दौरान कहीं पर भी बाढ़ चौकी नहीं मिली।
-अधिकारियों ने कहा कि वह यमुना नदी पर नजर रख रहे हैं
सकौती बाढ़ सुरक्षा चौकी के अधीन कुल 6 गांव आते हैं। सकौती, चौसाना, चौसाना जदीद, भडी, मुस्तफाबाद और साल्हापुर। सकौती में धरातल पर कोई सुरक्षा चौकी नहीं मिली, जबकि सकौती में कागजोें में चौकी दर्शाई गई है।
-ग्रामीणों का आक्रोश
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन सिर्फ कागजों पर सक्रिय है। न चौकियां, न बचाव दल और न ही ठोस इंतजाम दिखाई दिए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हालात विकराल हो जाएंगे।
किसान सरफराज ने बताया कि एक नंबर ठोकर जो अब तक सैकड़ों किसानों और पुरानी भडी गांव की सुरक्षा की ढाल बनी हुई थी, अब टूटने की कगार पर है। सरफराज का कहना है कि अगर ये ठोकर टूट गई तो बड़े पैमाने पर खेतों, फसलों और गांवों को नुकसान हो सकता है।
इन्होंने कहा
डीएम अरविंद कुमार चौहान ने कहा कि बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को अलर्ट किया गया है। यदि लापरवाही मिली तो कार्रवाई की जाएगी।