संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। सरकार खेल को अनिवार्य शिक्षा में शामिल कर चुकी है। राष्ट्रीय खेल हॉकी की बात करें तो हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती पर प्रतियोगिता का आयोजन भी होता है। जनपद में हॉकी के प्रशिक्षक ही नहीं है, इस स्थिति में हॉकी के जादूगर कहां से आएंगे।
जनपद के वित्तविहीन स्कूलों को छोड़ राजकीय और सहायता प्राप्त कॉलेजों में भी हॉकी का एक भी प्रशिक्षक नहीं है। ऐसे में कैसे हॉकी के जादूगर तैयार कर सकते हैं। जनपद में खेल की बात करें तो हाईस्कूल व इंटर स्तर पर खेल अनिवार्य शिक्षा के रूप में शामिल किया गया है, लेकिन खेल प्रशिक्षकों की बात करें तो स्थिति बहुत ही दयनीय है। जनपद में संचालित 25 राजकीय कॉलेजों में एक भी खेल शिक्षक तैनात नहीं है। वहीं सहायता प्राप्त विद्यालयों की बात करें तो उनमें भी कुछ खेल शिक्षक हैं, तो हॉकी के लिए मैदान ही नहीं है। वित्तविहीन कॉलेजों की बात करें तो यहां खेलों के नाम पर बस खानापूर्ति की जा रही है।
n राष्ट्रीय खेल, फिर भी नहीं कोई ध्यान : हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल है, लेकिन राष्ट्रीय खेल के प्रति सरकार को कितनी चिंता है इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जनपद के एक भी राजकीय कॉलेज और मिनी स्टेडियम में हॉकी का प्रशिक्षक ही नहीं है।
खेल दिवस की खबर से संबंधित फोटो- क्रिकेटर उज्ज्वल वत्स।
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