जलालाबाद रोडवेज अड्डे पर खड़ी बसें।
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शामली/जलालाबाद। जिले में रक्षाबंधन के दो दिन शेष हैं और कोरोना महामारी के कारण लगाए गए लॉकडाउन के पहले दिन यूपी रोडवेज की ज्यादातर बसें डिपो में खड़ी रहीं। कम सवारियों के निकलने से यूपी रोडवेज की आय हजारों में सिमट कर रह गई। हालात यह बन गए कि जलालाबाद से लखनऊ के लिए संचालित की गई रोडवेज बस बिजनौर में खाली हो गई। सवारियों न मिलने से बिजनौर से लखनऊ के लिए रवाना नहीं हो पाई।
शनिवार को लॉकडाउन की अवधि में यूपी रोडवेज बसों के संचालन की अनुमति दी गई थी। बस अड्डा दोपहर तक सूना रहा। दोपहर बाद प्रतिदिन की अपेक्षा शनिवार को पांच-दस प्रतिशत सवारियां निकल पाईं। यूपी रोडवेज के शामली डिपो में कुल 22 अनुबंधित बसों में से संचालन के लिए 18 बसों को तैयार किया गया। जिसमें से मात्र 10 बसों का संचालन हो पाया। संचालित रोडवेज बसों में अपेक्षा से कम सवारियां ही निकल पाईं। बस अड्डे सवारियों का टोटा रहने से सूने पड़े रहे। शामली रोडवेज बस अड्डे के वरिष्ठ केंद्र प्रभारी राजेंद्र चौहान ने बताया कि शामली से लखनऊ के लिए बहुत कम सवारियां निकलीं। लॉकडाउन के दौरान अपेक्षा से कम सवारियां निकल रही हैं। जिस कारण प्रतिदिन दो लाख रुपये से घटकर 1.54 लाख तक सिमट गई।
शनिवार को सवारियां कम निकलने से शामली रोडवेज डिपो की आय प्रभावित हुई है। शनिवार को आय एक लाख से कम आने की संभावना है। जिले के जलालाबाद बस अड्डे में निगम की 34 बसों में प्रतिदिन 28 निगम की बसों का संचालन होरहा है। शनिवार को लॉकडाउन के दौरान पूरे दिन दो-तीन रोडवेज बसें चल पाई है। जिनमें सवारियां बहुत कम निकल पाई है। डिपो का कार्य देख रहे योगेंद्र सिंह ने बताया कि प्रतिदिन का दो लाख की आय का लक्ष्य है, मगर रविवार को मात्र लखनऊ से ही आई एक बस से 25 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई है।
छह बसों के कागजात सरेंडर किए
जलालाबाद बस अड्डे में सवारियों के अभाव में छह रोडवेज बसों के कागजात एआरटीओ को सेरेंडर कर दिए गए हैं। निगम की रोडवेज बसें अड्डे पर खड़ी हैं। शनिवार सुबह आठ बजे जलालाबाद डिपो से लखनऊ के लिए रोडवेज बस को बिजनौर के लिए संचालित किया गया था। बिजनौर तक सवारियां मिल पाई। बिजनौर जाकर सवारियां न मिलने से बसें वहां खड़ी हो गईं। बिजनौर से लखनऊ के लिए रोडवेज बस का संचालन नहीं हो पाया है। जलालाबाद बस अड्डे के प्रभारी योगेंद्र सिंह के मुताबिक बस स्टैंड पर 34 रोडवेज बसों में से 28 का संचालन हो रहा है। सवारियों के अभाव में छह निगम की बसें अड्डे में खड़ी है। छह बसों के कागजात एआटीओ को सरेंडर कर दिए गए हैं।