आलू के बीज गलने की आशंका, दोबारा बुआई की नौबत
अक्तूबर में किसान अगेती आलू की बुआई करते हैं। कई किसानों ने हाल ही में खेतों में आलू बोया है। गौना निवासी बिट्टू यादव के अनुसार, उन्होंने 50 बीघा में अगेती आलू की बुआई की थी। मंगलवार को ही बुआई पूरी हुई थी, लेकिन बारिश के बाद खेतों में पानी भर गया है। उनका कहना है कि पानी की वजह से मिट्टी में आलू का बीज गल सकता है और उन्हें दोबारा बुआई करनी पड़ सकती है।
रटौल के हाजी सुल्ताल, हाजी मुजक्किर और रहीश चौधरी समेत अन्य किसानों ने भी आलू की फसल में नुकसान की आशंका जताई है। किसानों का कहना है कि पहले ही बुआई पर काफी खर्च हो चुका है। अब फसल खराब होने से दोबारा बीज और मजदूरी का खर्च उठाना पड़ेगा।
सरसों की बुआई पर भी बारिश की मार
चमरावल, ललियाना और कहरका क्षेत्र में सरसों की बुआई कर चुके किसानों के खेतों में भी पानी भर गया है। किसानों का कहना है कि फसल डूबने से नुकसान हुआ है और कई खेतों में दोबारा बुआई की नौबत आ सकती है। इस तरह धान की तैयार फसल के साथ आलू और सरसों की नई बुआई पर भी बारिश का असर पड़ा है।
कोल्हू बंद होने से गन्ना किसान भी परेशान
बारिश का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं है। क्षेत्र में लगे गन्ना कोल्हू भी बंद हो गए हैं। बारिश के चलते गन्ने की छिलाई और कोल्हू का काम प्रभावित हुआ है। इससे गन्ना किसानों की परेशानी बढ़ गई है।
किसानों ने डीएम से मांगा मुआवजा
लहचौड़ा निवासी सचिन शर्मा ने बताया कि उन्होंने 15 बीघा में धान की फसल बोई थी। पहले तेज हवा और बारिश से फसल खेतों में गिर गई थी। मजदूरों से कटाई कराने के बाद अब कटी हुई फसल बारिश के पानी में डूब गई है। गौना निवासी बिट्टू यादव ने 50 बीघा में अगेती आलू की बुआई की थी। उनका कहना है कि खेतों में पानी भरने से बीज गलने की आशंका है।
रटौल निवासी हाजी सुल्ताल चौधरी ने बताया कि उनकी 30 बीघा से अधिक धान की फसल बारिश के कारण खराब हो गई है। उन्होंने सरकार से किसानों को मुआवजा देने की मांग की है। भाकियू महासचिव शिवदत्त शर्मा ने भी कहा कि बारिश से धान की फसल को नुकसान पहुंचा है और आलू की बुआई प्रभावित हुई है। उन्होंने जल्द जिलाधिकारी से मिलकर किसानों के नुकसान का मुआवजा दिलाने की मांग उठाने की बात कही।