शामली। पूस की कड़कड़ाती ठंड में लावारिस पशुओं ने किसानों की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया है। ऐसे में किसान फसल बचाए या अपनी जान। लावारिस पशु मौका पाते ही फसल चर जाते हैं। इस कारण किसान शाम होते ही खेतों में पहुंच जाते हैं। पूरी रात जागकर फसलों की रखवाली करने के लिए मजबूर हैं।
गोशाला में संरक्षित गोवंशों से अधिक लावारिस पशु झुंड बनाकर खेतों में घूम रहे हैं। इन दिनों खेतों में गेहूं, सरसों, गन्ना, आलू की फसल खड़ी है। समृद्ध किसानों ने पशुओं से फसलें बचाने के लिए खेत के चारों और कंटीले तार लगा रखे हैं। वहीं, छोटे किसान फसल बचाने के लिए पूस की रात में खेतों पर रखवाली कर रहे हैं। रात्रि में पड़ताल की गई तो गांव कुड़ाना, बधेव, शामली मार्ग के जंगल क्षेत्र में पशुओं से फसलों को बचाने के लिए किसान कड़कड़ाती ठंड भरी पूस की रात खेतों में अलाव जलाकर रह रहे हैं। कुछ किसान चकरोड पर खड़े होकर हाथ में डंडा व टॉर्च की सहायता से फसलों की रखवाली करते मिले।
-किसानों के चैन पर भारी पशु
गांव कुड़ाना के किसान पालाराम रात्रि में खेत पर मिले। किसान का कहना है कि गेहूं की फसल को बचाने के लिए रातभर खेत में पहरा देना पड़ रहा है। तीन बीघा गेहूं की फसल को बचाना मुश्किल हो रहा है। ठंड से बचाव के लिए अलाव जलाना पड़ता है।
हाथ में टॉर्च और डंडा लेकर खेत की निगरानी
खेत पर मिले किसान सतबीर का कहना है कि दो बीघा गेहूं की फसल बचाने के लिए हाथ में टॉर्च व डंडा लेकर निगरानी करनी पड़ रही है। किसानों की सुध न शासन ले रहा है और न ही क्षेत्रीय प्रतिनिधि सांसद विधायक।
सर्द रात में भी खेतों की रखवाली
शहर शामली के किसान प्रेमपाल, गांव बधेव के किसान सर्वेश व कुड़ाना के किसान सुरेश और अशोक जयंत का कहना है कि गेहूं और सरसों की फसल बचाना मुश्किल हो रहा है। किसान दिन रात खेतों पर रखवाली के लिए खड़े रहते हैं।
आवारिश पशुओं को संरक्षित किए जाने के लिए लगातार अभियान चलाया जाता है। हाल में गोशालाओं के निरीक्षण के दौरान भी संबंधित अधिकारियों को अभियान चलाकर पशुओं को संरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। -विनय कुमार तिवारी, सीडीओ
गांव कुड़ाना में गेहूं की फसल को आवारा पशुओं से बचाने के लिए रात में खेत में पहुंचा किसान सतबीर