थानाभवन। पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे पौधरोपण अभियानों के बीच कृषि उत्पादन मंडी समिति परिसर में सैकड़ों पौधों के समय पर रोपण न होने से अभियान की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। लंबे समय से खुले में रखे गए पौधे अब सूखने की स्थिति में पहुंच गए हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण की पहल प्रभावित होती दिखाई दे रही है।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मंडी समिति परिसर में करीब दो हजार पौधे भेजे गए थे, जिन्हें विभिन्न स्थानों पर रोपित किया जाना था। लेकिन समय पर वितरण और रोपण न होने के कारण कई पौधों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द रोपण नहीं किया गया तो बड़ी संख्या में पौधे खराब हो सकते हैं।
स्थानीय निवासी दिपांशु कुमार ने कहा कि पौधों का रोपण अपेक्षित गति से नहीं हो पाया, जिसके कारण लंबे समय से खुले में रखे पौधे सूखने के कगार पर पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियान केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं, जबकि जमीन पर स्थिति अलग है।
वहीं विकास कुमार ने कहा कि यदि पौधों को समय पर जमीन में नहीं लगाया गया तो पौधरोपण अभियान का उद्देश्य ही प्रभावित हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण तभी सफल होगा जब पौधों की उचित देखभाल और समय पर रोपण सुनिश्चित किया जाए।
ग्रामीण रामवीर सिंह ने जिम्मेदारी तय करने की बात उठाते हुए कहा कि जिस गांव या क्षेत्र में पौधरोपण हो, उसकी जिम्मेदारी संबंधित प्रधान या जिम्मेदार व्यक्ति की होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक पेड़ मां के नाम सिर्फ नारा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के साथ पालन किया जाना चाहिए, तभी आने वाली पीढ़ियों को प्रदूषण से बचाया जा सकेगा।
अधिकांश पौधे किसानों और विभिन्न स्थानों पर वितरित किए जा चुके हैं। पर्यावरण दिवस से पहले प्राप्त लगभग दो हजार पौधों में से अधिकांश का रोपण पूरा हो चुका है, जबकि शेष बचे पौधों को भी शीघ्र ही निर्धारित स्थलों पर रोपित कर दिया जाएगा।- अनुराग सिंह, मंडी समिति सचिव।