शामली। जैन मुनि 108 विव्रत सागर महाराज ने कहा कि आध्यात्मिक मार्ग पर चलकर ही सच्चा सुख और शांति प्राप्त की जा सकती है।
दिगंबर जैन धर्मशाला में सोमवार को प्रवचन करते हुए जैन मुनि ने कहा कि सच्चा आनंद प्राप्त करने के लिए सांसारिक सुखों के मोह को त्यागना, आत्म-चिंतन व आध्यात्मिक प्रयोजन को समझना जरूरी है। इसके बाद पता चलता है कि हम क्षणिक सुखों में उलझकर जीवन की वास्तविक परीक्षा को भूल जाते हैं और स्थायी सुख के लिए वास्तविक मार्ग की उपेक्षा करते हैं। मनुष्य आनंद की तलाश में रहता है, लेकिन उसे केवल क्षणिक, भौतिक सुखों (जैसे टीवी देखना, खेल खेलना) का अनुभव होता है।
ये हमें हमारी वास्तविक जिम्मेदारियों (जैसे परीक्षा की तैयारी) से विचलित करते हैं। अंततः दुख का कारण बनते हैं। सांसारिक सुख अंततः पश्चाताप की ओर ले जाते हैं। हम खुद को बुद्धिमान समझते हैं, लेकिन वास्तव में हम बुद्धिहीन हैं, क्योंकि हम उन स्पष्ट चेतावनियों जैसे तंबाकू के पैकेट पर कैंसर की चेतावनी को नजरअंदाज करते हैं, जो हमारे जीवन को नष्ट कर सकती हैं। इसी तरह हम बचपन से चली आ रही धार्मिक क्रियाओं को बिना किसी गहरे प्रयोजन के करते रहते हैं। ये क्रियाएं तब तक व्यर्थ हैं, जब तक उनके पीछे का वास्तविक प्रयोजन नहीं समझा जाता।
चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलन अर्चना जैन एवं उनके भाई विनोद जैन के द्वारा किया गया। पाद प्रक्षालन राजेश जैन, सीमा जैन परिवार द्वारा और शास्त्र भेंट सुनीता जैन, रेखा जैन द्वारा किया गया। सुबह के समय जैन मुनि के सानिध्य में अभिषेक, शांति धारा चिन्मय जैन, अरुण जैन व अनुज जैन द्वारा संपन्न हुई।