शामली। 16 ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर घोटाला करने के मामले में जसाला, लिसाढ़, नाला और अन्य गांवों में करीब 41 लाख के घोटाला करने पर ग्राम सचिव मनोज कुमार और निशांत वत्स और सुशील कुमार को निलंबित किया है। अन्य ग्राम सचिवों पर भी जल्द ही गाज करना तय माना जा रहा।
16 ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर किए गए घोटाले प्रकरण में अमर उजाला ने 19 नवंबर के अंक में 16 ग्राम पंचायतों में बिना अनुमति कराए 94 कार्य नामक शीर्षक से प्रमुखता के साथ खबर प्रकाशित की थी। इससे पूर्व में भी प्रकरण में कई खबरें प्रकाशित की गई थी। इस मामले में जांच टीम ने ग्राम सचिवों को दोषी माना था, जिनका वेतन रोकने के आदेश दिए गए थे।
जिलाधिकारी अरविंद चौहान ने बताया कि विभागीय टीम की जांच में सामने आया था कि लिसाढ़ और गंगेरु में कराए गए विकास कार्य में कुटेशन प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। अभिलेख चोरी होने की भ्रामक सूचना ग्राम सचिव सुशील कुमार ने दी। यही नहीं अभिलेख भी उपलब्ध नहीं कराए। सुशील को डीपीआरओ की रिपोर्ट पर निलंबित किया गया।
इसके अलावा ग्राम विकास अधिकारी निशांत मान ने करीब छह लाख के कराए गए विकास कार्यों के अभिलेख चोरी होना बताया। ब्रहमखेड़ा, जसाला गांव में विकास कार्यों में अनियमितता बरती गई, मनमाने तरीके से काम किया गया। जिस पर निशांत को जिला विकास अधिकारी की रिपोर्ट पर निलंबित किया गया। इसी तरह ग्राम विकास अधिकारी मनोज कुमार ने कैराना के भारसी और नाला गांव में टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं किया, मनमाने तरीके से काम किया। उच्चाधिकारियों के आदेश का भी पालन नही किया गया। जिस पर उसे भी निलंबित किया गया।
तीनों ने करीब 41 लाख का घोटाला किया। अन्य की जांच की जा रही है, जो भी दोषी पाया जाता है उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। वहीं इसमें ऊषा कंस्ट्रक्शन कंपनी को भुगतान करने की बात सामने आई है।