शामली। कोरोना संक्रमण काल में रामलीलाओं के मंचन पर तो ग्रहण लगा ही रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले जलाने की परंपरा भी इस बार सिमट गई है। जिला मुख्यालय पर इस बार पुतलों का दहन नहीं होगा, जबकि कैराना में तीन के बजाय एक ही पुतला जलाया जाएगा।
इस साल कोरोना काल में शहर के श्री हनुमान धाम पर श्री रामलीला का मंचन नहीं हो रहा है। केवल वर्चुअल प्रसारण किया जा रहा है। हनुमान धाम के प्रधान सलील द्विवेदी ने बताया कि रावण, कुंभकरण और मेघनाद के 60-61 फिट के पुतलों को बघरा में बनवाकर दशहरे के दिन दहन किया जाता था। इस बार हनुमान धाम पर दशहरा मेले का आयोजन नहीं होगा। साथ ही पुतलों का भी दहन नहीं किया जाएगा।
कैराना में देवी मंदिर तालाब के किनारे दशहरे के दिन 60 हजार रुपये की लागत के रावण का 50 फिट, कुंभकरण का 45 फिट और मेघनाद का 40 फिट ऊंचा पुतला दहन किया जाता था। कैराना श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष जयपाल कश्यप ने बताया कि इस बार दशहरे पर पुतला दहन की अनुमति नहीं है। अनुमति मिली तो सिर्फ 20 फिट ऊंचे रावण के पुुतले का दहन किया जाएगा।
उधर, जलालाबाद श्रीराम लीला के डायरेक्टर देवराज जुनेजा ने बताया कि इस बार लंका दहन और रावण के पुतले की अनुमति मिलने पर दहन किया जाएगा। पुतलों को चरथावल में तैयार कराया जा रहा है। इस बार पुतले तैयार करने पर 25 हजार रुपये की लागत आई है। कांधला श्रीराम लीला कमेटी के प्रबंधक रामकुमार सिंघल ने बताया कि हर वर्ष रावण, मेघनाद और कुंभकरण के लगभग 60-65 फिट ऊंचे पुतलों का दहन किया जाता था। इस बार केवल रावण का पुतला जलाया जाएगा। इसकी ऊंचाई भी लगभग 20 फिट ही रखी जाएगी।