शामली। खेतों में पड़ी पराली को जलाने के बजाय यदि उससे खाद बनाई जाए तो इससे जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और प्रदूषण भी नहीं होगा।
उप निदेशक कृषि डॉ. शिवकुमार केसरी ने बताया कि दस क्विंटल पराली की कंपोस्टिंग से चार क्विंटल कार्बनिक पदार्थ मिलेगा। इसके साथ ही 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलोग्राम फास्फोरस, 25 किलोग्राम पोटाश, 1.5 किलोग्राम सल्फर एवं 50 से 70 प्रतिशत सूक्ष्म पोषक तत्व मिलेगा। यह पोषक तत्व यदि बाजार से खरीदकर खेतों में डालें तो काफी महंगे पड़ते हैं। पोषक तत्वों के अलावा चार क्विंटल कार्बनिक पदार्थ भूमि में मिलकर उसकी उर्वरा शक्ति को बढ़ाते हैं। इन तत्वों की उपलब्धता भूमि में रहने से मृदा का तापमान, पीएच, नमी और जीवंश कार्बन संतुलित रहता है और भूमि का स्वरूप भी नहीं बदलता।
-------
पत्ती एवं पराली जलाने से होते हैं नुकसान
कृषि विभाग के अधिकारियों के मुुताबिक फसल अवशेष जैसे पत्ती एवं पराली जलाने से काफी नुकसान होता है। एक टन पराली जलाने से तीन किलोग्राम कणिका तत्व, 60 किलो कार्बन मोनो ऑक्साइड, 1460 किलो कार्बन डाई आक्साइड, 199 किलो राख, दो किलो सल्फर डाई आक्साइड गैस निकलती है। ये सब प्रदूषक तत्व हैं। इनका मानव, पशु-पक्षियों एवं अन्य जीवों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है तथा अस्थमा, आंखों में जलन, गंभीर स्थिति में हृदयाघात, कैंसर तक होने की आशंका रहती है।
-------
फसल अवशेष जलाने होती है कार्रवाई
एनजीटी से पारित आदेशों के अनुसार फसल अवशेष जलाने पर दो एकड़ क्षेत्र से कम पर 2500 रुपये, दो एकड़ से पांच एकड़ तक पांच हजार रुपये, पांच एकड़ से अधिक पर 15 हजार रुपये प्रति घटना की दर से जुर्माना लगाया जाता है। - डॉ. शिवकुमार केसरी, उप निदेशक कृषि
--------
फार्म मशीनरी बैंक से यंत्र लेकर बनाएं खाद
उप निदेशक कृषि ने बताया कि किसान जल्चर, रोटावेटर, सुपर सीडर से कटिंग कर फसल अवशेष को मिट्टी में मिला सकते हैं। पत्ती-पराली पर पूसा कैप्सूल, डी कंपोजर का प्रयोग कर गला-सड़ाकर कार्बनिक खाद के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि किसान जिले में बनाए गए फार्म मशीनरी बैंकों से यंत्र किराये पर लेकर फसल अवशेष का प्रबंधन कर सकते हैं।