इनकी आंखों से रोशन होगी दूसरों की दुनिया
शामली। यदि आप इस दुनिया से जाने के बाद भी दूसरों के शरीर में जीवित रहना चाहते हैं तो नेत्रदान करें। आपकी आंखें किसी की दुनिया को रोशन कर सकती हैं। इस सौभाग्य को हासिल करने के लिए जनपद के कई लोगों ने मृत्यु उपरांत अपने नेत्रदान करने के लिए संकल्प पत्र भर रखे हैं। यह सिलसिला लगभग 35 साल से चल रहा है। जनपद में ऐसे एक हजार से ज्यादा लोग हैं, जिन्होंने नेत्रदान और देहदान के लिए संकल्प पत्र भर रखे हैं।
35 साल पहले दो हजार लोगों ने लिया था संकल्प
नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन अरविंद संगल ने स्वयं नेत्रदान का संकल्प ले रखा है। उन्होंने बताया कि छात्र जीवन में उन्होंने दिल्ली की संस्था के साथ मिलकर शहर में कैंप लगवाया था। तब करीब दो हजार लोगों ने नेत्रदान के संकल्प पत्र भरे थे। उन्हें प्रमाणपत्र दिए गए थे, ताकि वे अपने घरों में उन्हें रख सकें और परिजनों को भी इसकी जानकारी दी। परिजनों को पता होने से संबंधित व्यक्ति की मृत्यु के बाद वह कोई आपत्ति नहीं करते हैं। शामली में सबसे पहला नेत्रदान कथावाचक अरविंद दृष्टा की माता जी का हुआ था। इस पर अरविंद दृष्टा को 1990 में दिल्ली में सम्मानित भी किया गया था।
एक साल में पांच लोगों के नेत्रदान कराए
वरिष्ठ नागरिक सेवा समिति के अध्यक्ष रमेशचंद विश्वकर्मा का कहना है कि उनकी समिति नेत्रदान कराने के लिए कार्य करती है। उन्होंने खुद संकल्प पत्र भर रखा है। वह संकल्प पत्र भरवाने के साथ ही लोगों को प्रेरित करते हैं। किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके परिजनों से बात करते हैं और मृतक के नेत्रदान कराने के लिए प्रेरित करते हैं। एक वर्ष में पांच लोगों के नेत्रदान करा चुके हैं। मृत्यु के छह घंटे बाद तक नेत्रदान हो सकता है।
जेब में रखकर घूमते हैं नेत्रदान का कार्ड
हनुमान रोड पर स्थित लीला फैशन के संचालक नफीस अहमद नेत्रदान का कार्ड हमेशा अपनी जेब में रखते हैं। वह बताते हैं कि उन्होंने एक जनवरी 1990 को हनुमान धाम में आयोजित हुए कैंप में नेत्रदान करने का संकल्प पत्र भरा था। उनके अलावा अन्य कई लोगों ने नेत्रदान का संकल्प लिया था। वह अपना कार्ड हमेशा साथ रखकर घूमते हैं, ताकि परिजनों और अन्य लोगों को जानकारी रहे।
मेडिकल कॉलेज में लैब को देख मिली प्रेरणा
कुड़ाना गांव निवासी 64 वर्षीय जयवीर ने अपना देहदान का संकल्प कर रखा है। बताया कि वह बेटी सीमा के मेडिकल में प्रवेश के लिए दिल्ली गए थे। वहां लैब को देखकर उन्हें देहदान करने का विचार आया। वह अन्य लोगों को नेत्रदान और देहदान के लिए प्रेरित करते हैं। ऐसा करके आप मृत्यु के उपरांत भी जीवित रह सकते हैं।
डेरा सच्चा सौदा से प्रेरित होकर दिया देहदान
कांधला के मोहल्ला रायजादगान निवासी आनंद प्रकाश वर्मा डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी हैं। उन्होंने डेरा सच्चा सौदा में लगने वाले शिविरों से प्रेरित होकर देहदान का संकल्प लिया है। वह चाहते हैं कि उनके इस दुनिया से जाने के बाद भी वह किसी के काम आ सकें।
नेत्रदान में आंखों का कार्निया लिया जाता है
नेत्रदान में व्यक्ति की पूरी आंख नहीं ली जाती, बल्कि आंखों का केवल कार्निया यानी पारदर्शी हिस्सा लिया जाता है। नेत्रदान का संकल्प पत्र भरने वाले व्यक्ति की मौत होने की सूचना मिलने पर आई-बैंक की टीम निर्धारित समय पर पहुंचती है और आंखों से कार्निया ले लेती है। इसे खास किस्म के सोल्यूशन में रखा जाता है।
नफीस अहमद- फोटो : SHAMLI
जयवीर कुड़ाना- फोटो : SHAMLI
आनंद वर्मा- फोटो : SHAMLI
पूर्व चेयरमैन अरविन्द संगल- फोटो : SHAMLI