शामली। फौजियों के नाम से प्रसिद्ध गांव लिसाढ़ के अलावा गांव कुड़ाना, किवाना, लांक, बहावड़ी और हसनपुर के युवाओं में देश सुरक्षा के प्रति आज भी अलग ही जज्बा है। इन गांव के रिटायर्ड फौजी भी अपने बेटों को तैयारी कराते हुए सेना में भर्ती कराते आ रहे हैं। गांव के युवा आयु पूरी होने से पहले ही गांव की सड़कों और मैदानों में सेना में भर्ती होने के लिए तैयारी में जुट जाते हैं।
वह सुबह-शाम कड़ी मेहनत करते हुए सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने के प्रति उत्साहित रहते हैं। इन सभी छह गांवों में 700 से अधिक युवा सेना में भर्ती होकर देश सेवा कर रहे हैं।
गांव लिसाढ़ की बात की जाए तो हाल में लगभग 120 युवा भारतीय थल सेना में तैनात हैं और 70 रिटायर्ड फौजी हैं। गांव के रिटायर्ड हवलदार प्रवेंद्र मलिक ने अपने पुत्र अखिल मलिक को तैयारी कराते हुए वर्ष 2025 की भर्ती में कराया। उनका पुत्र अखिल वर्तमान में मध्य प्रदेश के जबलपुर में प्रशिक्षण ले रहे हैं। वहीं रिटायर्ड हवलदार प्रमोद कुमार ने भी अपने दोनों पुत्रों को देश सेवा के लिए तैयार करते हुए सेना में भर्ती कराया। उनके पुत्र रोहित और मोहित थल सेना में तैनात होकर देश सेवा कर रहे हैं।
गांव के रिटायर्ड हवलदार महेंद्र ने बताया कि उन्होंने 1971 की लड़ाई लड़ी थी। उनके पुत्र विनोद कुमार भी सूबेदार के पद से रिटायर्ड हो चुके हैं। वहीं गांव कुड़ाना के हाल में 70 युवा देश सेवा कर रहे हैं और 30 से ज्यादा रिटायर्ड फौजी हैं। गांव लांक में 80 युवा सेना में तैनात हैं, जबकि गांव किवाना में 40 तैनात हैं व 25 रिटायर्ड फौजी हैं। गांव बहावड़ी में 70 युवा देश सेवा कर रहे हैं और 25 के लगभग रिटायर्ड फौजी हैं। हसनपुर गांव के भी पचास से अधिक लोग सेना में हैं।
-हसनपुर के सोहनबीर और सतेंद्र मलिक कारगिल के युद्ध में हुए थे शहीद
गांव हसनपुर के सोहनबीर मलिक और सतेंद्र मलिक वर्ष 1999 में हुए कारगिल के युद्ध में शहीद हो गए थे। शहीदों की मूर्तियां भी स्थापित की गई है। वहीं दोनों शहीदों को मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित किया गया था।
- गांव लिसाढ़ में रिटायर्ड फौजी प्रवेंद्र मलिक चलाते हैं निशुल्क प्रशिक्षण केंद्र
गांव लिसाढ़ के प्रवेंद्र मलिक वर्ष 2011 में हवलदार के पद से रिटायर्ड हुए थे। इसके बाद उन्होंने युवाओं में देश सेवा का जज्बा भरने का संकल्प लिया। उन्होंने गांव से बाहर अपने खुद के घेर में ही निशुल्क प्रशिक्षण केंद्र खोल दिया। वह अब तक गांव लिसाढ़ के साथ ही आसपास के गांव के युवाओं को प्रशिक्षण देते हुए अब तक 300 से ज्यादा युवाओं को सेना में भर्ती करा चुके हैं। उन्होंने वर्ष 2021 में हुई भर्ती में 14 युवा, वर्ष 2024 में नौ युवा और वर्ष 2025 में 11 युवाओं का चयन कराया है। वह केंद्र पर गरीब युवाओं को किट और खाने के लिए बादाम व अन्य सामान की भी सहायता करते हैं। केंद्र पर ही दौड़, उठक-बैठक, रस्सा चढ़ना, बीम मारना, गड्ढ़ा कूदने का पूरा प्रशिक्षण देते हुए सेना के लिए पूरी तरह तैयार करते हैं। - गांव कुड़ाना के रविंद्र मलिक हैं लेफ्टिनेंट कर्नल
गांव कुड़ाना के किसान राजबीर मलिक के बेटे रविंद्र मलिक का सपना बचपन से ही देश सेवा करने का रहा। वह 1995 में परीक्षा देकर सेना में सिपाही के पद पर भर्ती हुए। जिसके बाद तैयारी करते हुए वर्ष 2005 में कमीशन लेने पर लेफ्टिनेंट बने। हाल में वह लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर तैनात रहकर देश सेवा कर रहे हैं।
यह बोले
लिसाढ़ गांव के ग्राम प्रधान अजित सिंह का कहना है कि गांव के युवाओं में सेना में भर्ती होने का जज्बा है जिसके लिए वह तैयारी में जुटे हुए हैं। यही कारण है कि गांवों को फौजियों के गांव से भी जाना जाता है।
कुड़ाना गांव के लेफ्टिनेंट कर्नल रविंद्र का कहना है कि गांव के युवा सेना में भर्ती होने के लिए मेहनत कर रहे हैं। छुट्टी पर आने के दौरान युवाओं को सेना में भर्ती होने के टिप्स दिए जाते हैं।