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सस्पेंड हुए अधिकारी को फिर बनाया लेखपाल

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थानाभवन। वैसे तो सरकार से लेकर प्रशासन तक सिस्टम को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के दावे करते हो, लेकिन प्रशासन की कार्यशैली ही अवैध वसूली के इस धंधे को हवा दे रहे हैं। इसी का परिणाम है कि डेढ़ साल पहले रिश्वत लेने के मामले में जिस लेखपाल को सस्पेंड किया गया था, अब वर्तमान लेखपाल को हटाकर उसी दागदार लेखपाल को क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंप दी है।
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डेढ साल पहले हसनपुर लुहारी व जलालाबाद देहात क्षेत्र में लेखपाल की जिम्मेदारी नफीस पर थी। उस समय हसनपुर लुहारी गांव से एक वीडियो वायरल हुई थी। जिसमें लेखपाल क्षेत्र के गांव अंबेहटा याकूबपुर के एक किसान से रिश्वत ले रहा था। मामला दिल्ली-सहारनपुर हाइवे पर अंबेहटा याकूबपुर में बन रहे टोल प्लाजा के मुआवजे को लेकर था। वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने करवाई करते हुए लेखपाल को सस्पेंड कर दिया था। जिसके बाद धर्मपाल को लेखपाल नियुक्त किया था। धर्मपाल के बाद अशोक कुमार को लेखपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
पिछले कुछ दिनों से छात्र लेखपाल की शिकायत कर रहे थे कि लेखपाल उनके आय-जाति के प्रमाण पत्रों को निरस्त कर रहे हैं। जबकि उन्होंने जनसेवा केंद्रों पर आवेदन करने में सभी जरूरी दस्तावेज संलग्न कर रहे हैं। छात्रों की लगातार शिकायत के बाद प्रशासन ने लेखपाल को हटा दिया। अब प्रशासन ने अशोक कुमार के स्थान पर फिर से नफीस को लेखपाल की जिम्मेदारी सौंपी है। यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। क्योंकि नफीस पर लगातार आरोप लगते रहे हैं। जलालाबाद देहात में भी वायरल हुई थी वीडियो अंबेहटा याकूबपुर के अलावा जलालाबाद देहात में भी दो लोगों के बंटवारे को लेकर एक वीडियो वायरल हुई थी। जिसमें यह तत्कालीन लेखपाल रिश्वत लेने के प्रकरण में शामिल पाया गया था।
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वर्जन-
डेढ़ साल पहले का प्रकरण मेरे संज्ञान में नहीं है। जहां तक मेरी जानकारी में है अब अंबेहटा याकूबपुर गांव उक्त लेखपाल के पास नहीं है। बाकी पूरे मामले की छानबीन की जाएगी।- बृजेश कुमार, उपजिलाधिकारी।
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