शामली। कोरोना काल में पहले लॉकडाउन और फिर टीकाकरण बंद होने की वजह से शून्य से दो साल तक के 4000 बच्चों का रुटीन टीकाकरण का चक्र टूट गया था। सर्विलांस अभियान में ये बात सामने आने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग ने सभी का टीकाकरण शुरू करा दिया है।
बच्चों को अलग-अलग महीने में छह बार बीमारियों से बचाव के लिए टीके लगाए जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों का समय पर टीकाकरण बहुत जरूरी है। जिन बीमारियों के टीके बच्चों को नहीं लग पाते हैं, उन बीमारियों के होने की संभावना बढ़ जाती है। सितंबर माह में स्वास्थ्य विभाग का सर्विलांस अभियान चला। अभियान के दौरान आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की टीमों ने तीन लाख से ज्यादा घरों का डोर-टू-डोर सर्वे किया। सर्वे में शून्य से दो साल तक के करीब 4000 बच्चों का रुटीन टीकाकरण प्रभावित होना पाया गया। किसी का डेढ़ महीने तो किसी का साल भर वाला टीकाकरण का चक्र टूट गया। सर्विलांस अभियान में ये बात सामने आने के बाद अब इनका टीकाकरण शुरू कर दिया गया है। जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. आरके सागर ने बताया कि लगभग 3000 बच्चों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। बाकी को भी जल्द टीके लग जाएंगे।
समय पर टीका नहीं तो बच्चों को ये बीमारी हो सकती
- टीबी
- डिप्थीरिया
- टिटनेस
- हेपेटाइटिस
- डायरिया
कब-कौन सा टीका लगता है
जन्म के 24 घंटे में: बीसीजी, हेपेटाइटिस-बी, ओरल पोलिया वैक्सीन (ओपीवी-0)
छह हफ्ते पर: डीपीटी-1, इनएक्टिवेटिड पोलियो वैक्सीन (आईपीवी-1), ओपीवी-1, रोटावायरस-1, न्यूमोकॉकल कॉन्जुगेट वैक्सीन (पीसीवी-1)
दस हफ्तों पर: डीपीटी-2, ओपीवी-2, रोटावायरस-2
14 हफ्तों पर: डीपीटी-3, ओपीसी-3, रोटावायरस-3, आईपीवी-2, पीसीवी-2
9 से 12 महीनों पर: खसरा और रूबेला-1
16 से 24 महीनों पर: खसरा-2, डीपीटी बूस्टर-1, ओपीवी बूस्टर