शामली। महामारी ने फैक्टरी में मजदूरी कर परिवार का पेट पालने वाले अलीजान (34) को तो लील लिया, लेकिन उसके परिवार का अब कोई सहारा नहीं बचा है। घर में बूढ़ी मां, पत्नी और तीन मासूम बच्चे हैं। आठ माह की गर्भवती पत्नी बच्चों के साथ फिलहाल मायके में है। उन्हें अब बच्चों के भविष्य और उनके पालन पोषण की चिंता सता रही है।
कांधला क्षेत्र के गांव इस्सोपुर टील निवासी अलीजान इंदौर में राइस मिल में काम करता था। वह रमजान में अपने घर आया था। वहां से आने के बाद उसे बुखार हुआ और हालत ज्यादा खराब होती गई। दो मई को उसकी मौत हो गई। अलीजान के पीछे उसकी बूढ़ी मां शरीफन, पत्नी गुलशाना, दो बेटियां आसिया (10), नाजिया (7) तथा बेटा उमर (4) बेसहारा हो गए हैं।
गुलशाना आठ माह की गर्भवती है। गुलशाना के भाई मोहम्मद शफीक ने बताया कि फिलहाल गुलशाना बच्चों के साथ मायके में है। अलीजान की मौत के बाद परिवार में कोई कमाने वाला नहीं रहा। बच्चे छोटे हैं और हर समय उनके पालन-पोषण की चिंता रहती है।