शामली जनपद में एक खेत में लगी धान की फसल।
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शामली। धान फसल में मिथ्या कंडुवा रोग के आने की संभावना बढ़ गई है। इस रोग के लक्षण बालियां निकलने के बाद ही दिखाई पड़ते हैं। मुख्यत: इस रोग का फैलाव पुष्पावस्था में होता है। प्रकोप के पश्चात धान की बाली में दाने पीले व काले रंग के आवरण से ढक जाते हैं, जिसे हाथ से छूने पर हाथ में पीले, काले अथवा हरे रंग के पाउडर जैसे रोग के स्पोर लग जाते है। कभी-कभी इस रोग के लक्षण बाली के कुछ ही दानों पर दिखाई पड़ते हैं।
जिले में कैराना-बिड़ौली ऊन यमुना खादर क्षेत्र में धान की अगेती फसल लहरा रही है। अगेती प्रजाति की धान की फसल में बाले तक आ गई है। 60 प्रतिशत से अधिक धान की फसल बुआई हो चुकी है। धान की रोपाई हो चुकी है। पिछले एक सप्ताह से दिन और रात का तापमान बढ़ने और छुटपुट वर्षा का मौसम चल रहा है। ऐसे धान की फसल में मिथ्या कंडुवा रोग आने की संभावना बढ़ गई है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी विकास कुमार ने बताया कि धान में मिथ्या कंडुवा रोग पुष्पावस्था के समय आर्द्रता 90 प्रति से अधिक तापमान 25-35 डिग्री सेल्सियस तथा छुटपुट वर्षा होने पर रोग का प्रकोप अधिक होता है। उन्होंने कहा कि मिथ्या कंडुवा रोग प्रबंधन के संबंध में बताया गया कि यह रोग बीज व भूमि से फैलता है। प्रबंधन हेतु किसान खेत की मेड़ों व सिंचाई की नालियों को खरपतवार मुक्त रखे, ताकि रोग के कारक को फैलने का अवसर ना मिले। धान की नर्सरी-बुवाई हेतु प्रमाणित एवं स्वस्थ बीज का प्रयोग करें।
बीजोपचार हेतु स्यूडोमोनास फ्लोरिसेंस 10 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोलकर बीज को 30 मिनट तक भिगोकर अथवा ट्राइकोडर्मा की 5-10 ग्राम मात्रा प्रति किग्रा बीज की दर से मिलाकर प्रयोग करना चाहिए। रोग बीज जनित होने के कारण बीज को 2.5 से 3 ग्राम थीरम प्रति किग्रा बीज की दर से बीज शोधन कर बोना चाहिए। भूमि शोधन हेतु नीम की खली 150 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करे। यूरिया संतुलित मात्रा में व खंडों में प्रयोग करने, रोग के लक्षण दिखाई देने पर कॉपर हाइड्रोक्साइड 53.8 प्रति 1.500 किग्रा मात्रा को 500 लीटर पानी अथवा टैबुकोनाजोल 50 प्रति ट़्राईफ्लोक्सी स्ट्रोबिन 25 प्रति डब्लूजी 350 से 400 ग्राम मात्रा को 500 लीटर पानी मे घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करने का सुझाव दिया।