शामली। जिले की शामली, कैराना और ऊन तहसील के करीब 10 गांवों से होकर प्रस्तावित पानीपत-शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे निकलेगा। यह 750 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे करीब 35 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है, जो पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की रुड़की इकाई द्वारा एक्सप्रेसवे की तीन-डी अधिसूचना के गजट प्रकाशन की मंजूरी के लिए प्रस्ताव केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय, नई दिल्ली को भेजा गया है। किसानों को भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई का लंबे समय से इंतजार है।
डीएम आलोक कुमार यादव ने बताया कि शामली गोरखपुर एक्सप्रेसवे के लिए दो गांंव गोगवान जलालपुर एवं भैसानी इस्लामपुर में भूमि खरीद पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण रुडकी इकाई की ओर से प्रतिबंध लगाया जा चुका है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण दिल्ली की ओर से तीन डी के प्रकाशन की सूचना प्राप्त नहीं हुई है।
जिले से गुजरने वाला रूट
यह एक्सप्रेसवे शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बदायूं, हरदोई, संभल, लखनऊ, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, संतकबीर नगर और गोरखपुर समेत 22 जिलों से होकर गुजरेगा।
कनेक्टिविटी और जंक्शन
थानाभवन क्षेत्र के गोगवान-जलालपुर में इस एक्सप्रेसवे का प्रमुख जंक्शन बनाया जा रहा है। यहां अंबाला-शामली और दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से इसका संपर्क प्रस्तावित है, जिससे यह एक बड़ा ट्रांसपोर्ट नेटवर्क बनेगा।
जिलाधिकारी आलोक कुमार यादव के अनुसार गोगवान-जलालपुर और भैसानी इस्लामपुर गांवों में भूमि खरीद पर फिलहाल प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि तीन-डी अधिसूचना का आधिकारिक गजट प्रकाशन अभी प्राप्त नहीं हुआ है।
औद्योगिक गलियारा प्रस्ताव खारिज
जिले में प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे के लिए चयनित सात गांवों की भूमि हाईटेंशन लाइन के कारण खारिज कर दी गई है। प्रशासन अब नए विकल्पों पर विचार कर रहा है।