- दो बेटों की मौत के बाद योजना के तहत मिलने वाली धनराशि के लिए मांगी थी रिश्वत
- आरोपी अधिकारी ने पहले मांगे थे 20 हजार रुपये, 15 हजार रुपये हुए थे तय
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। दो बेटों को सड़क हादसों में खो चुके 67 वर्षीय सूबेदीन दो साल से अधिक समय से श्रम विभाग कार्यालय के चक्कर काट रहा था। उसने श्रमिक बेटों की मौत के बाद सरकार से मिलने वाली सहायता राशि के लिए श्रम विभाग में आवेदन किया था, लेकिन रिश्वत के बिना सहायता राशि जारी नहीं की गई। इससे विभाग के बड़े अधिकारी भी सवालों के घेरे में आ गए हैं और उनकी भूमिका भी संदेह के दायरे में है।
असदपुर जिड़ाना निवासी सूबेदीन ने बताया कि उनके बड़े बेटे जमील अहमद की चार साल पहले 36 वर्ष की उम्र में बीमारी के चलते मौत हो गई थी। उसका श्रमिक कार्ड बना हुआ था। सात जुलाई 2022 में छोटे बेटे मोहसिन की 28 वर्ष की उम्र में हरियाणा के पानीपत में सड़क हादसे में मौत हो गई। उसका भी श्रमिक कार्ड बना हुआ था। इस हादसे में वे भी घायल हुए थे। अब उनके तीन पुत्र हैं।
सूबेदीन के मुताबिक उन्होंने दोनों पुत्रों की मौत के बाद श्रम विभाग में सहायता राशि के लिए आवेदन किया था। मोहसिन की मौत के मामले में सवा पांच लाख रुपये व जमील की मौत के बाद सवा दो लाख रुपये सहायता राशि मिलनी है। दो वर्ष से अधिक समय से मुआवजा राशि के लिए विभाग के चक्कर काट रहे थे। अधिकारी उन्हें हर बार टरकाते रहे। आरोप है कि श्रम प्रवर्तन अधिकारी सुरेश प्रकाश गौतम ने खुलकर कहा कि जब तक रिश्वत नहीं दोगे तब तक मुआवजा राशि नहीं मिलेगी।
तीन दिन पहले भी वे उनसे मिले तो उन्होंने 20 हजार रुपये रिश्वत में मांगे, लेकिन उसने गरीब होने का हवाला दिया तो 15 हजार रुपये मोहसिन की फाइल स्वीकृत कराकर शासन को भेजे जाने की बात तय हुई। जमील की फाइल के बारे में कहा कि फाइल पास हो गई है। सहायता राशि जारी करने के लिए पांच हजार रुपये बाद में देना तय हुआ।
उन्होंने गांव के प्रधान को इस बारे में बताया तो उन्होंने अपने परिचित गांव दभेड़ी निवासी भाकियू एनसीआर के प्रदेश महासचिव असजद से मिलने को कहा। असजद के साथ उन्होंने सहारनपुर जाकर एंटी करप्शन थाने पर जाकर शिकायत दर्ज कराई। एंटी करप्शन टीम की योजना के अनुसार उन्होंने सोमवार को श्रम प्रवर्तन अधिकारी को 15 हजार रुपये रिश्वत देने का समय तय किया। टीम की तरफ से ट्रीट किए रुपये अधिकारी को दिए थे।
रिश्वत के लिए पहले कोड वर्ड में, बाद में खुलकर की बात
शामली। श्रम प्रवर्तन अधिकारी को रिश्वत लेने पर पकड़े जाने का कोई डर नहीं था। सूबेदीन के मुताबिक श्रम प्रवर्तन अधिकारी ने पहले उनकी तरफ दो अंगुली उठाकर रिश्वत में रुपये मांगे। उन्होंने दो हजार रुपये कहा तो उसने कहा कि इतने में कुछ नहीं होगा, 20 हजार रुपये देने पड़ेंगे। इसके बाद बातचीत में आरोपी अधिकारी ने यह भी कहा कि जितना पेट्रोल डालोगे, उतनी ही गाड़ी चलेगी। सूबेदीन का कहना कि आरोपी अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि वे कहीं चले जाएं, जब तक रिश्वत नहीं देंगे तब तक उन्हें सहायता राशि नहीं मिलेगी।
शामली में रिश्वत लेने के आरोपी श्रम प्रवर्तन अधिकारी सुरेश गौतम । संवाद
शामली में रिश्वत लेने के आरोपी श्रम प्रवर्तन अधिकारी सुरेश गौतम । संवाद