नए कानून से सराफा कारोबारियों में खलबली
शामली, कैराना। आगामी 15 जून से सोने की ज्वेलरी पर हॉलमार्क की अनिवार्यता को लेकर सराफा व्यापारियों में खलबली मची है। इसके लागू होने से छोटे शहरों के सराफा व्यापारियों के सामने बड़ी परेशानी आ जाएगी। पहले से ही कोरोना और सोने के तेज भाव की मार झेल रहे छोटे सराफा कारोबारियों के लिए हॉलमार्क की अनिवार्यता बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। जिले में हॉलमार्क लाइसेंसधारी नहीं हैं, जिस कारण अपने हाथों से सोने के जेवर बनाने वालों के सामने हॉलमार्क लगवाने की समस्या भी आएगी।
सराफा व्यापारी अंकुर वर्मा ने बताया कि कैराना और शामली में जेवर बनाने वाले कारीगर हैं। यदि कारीगर जेवर बनाता है तो हॉलमार्क लगवाने के लिए उसे मेरठ जाना पड़ेगा। ऐसे में खर्च व समय दोनों बर्बाद होंगे। सराफा व्यापारी मनोज वर्मा ने बताया कि पिछले साल व इस बार कोरोना के कारण सराफा कारोबार ठप हो गया है। ऊपर से सोने के तेज दाम होने के कारण ग्राहक जेवर नहीं बनवा रहे हैं। हॉलमार्क की अनिवार्यता के बाद तो काम ही बंद हो जाएगा।
सराफा व्यापारी विकास ने बताया कि कैराना में यदि किसी की दो ग्राम की सोने की अंगूठी बनाई तो कारीगर को हॉलमार्क के लिए मेरठ या सहारनपुर जाना होगा। इतना मुनाफा नहीं जितना खर्च आ जाएगा। उधर सराफा यूनियन के अध्यक्ष रमेश चंद वर्मा ने बताया कि उन्हें कल ही जानकारी मिली है कि सरकार ने हॉलमार्क अनिवार्यता कानून को जून 2022 तक स्थगित कर दिया है। फिलहाल इसे लागू नहीं किया जा रहा है।