शामली। दशलक्षण पर्व पर जैन आचार्य ज्ञानभूषण जी महाराज और ज्ञान गंगा माता के सानिध्य में इंद्र ध्वज महामंडल विधान एवं विश्वशांति महायज्ञ से शुरू हो गया।
शुक्रवार को कैराना रोड स्थित फव्वारा चौक पर हाथी खाना जैन स्ट्रीट में दशलक्षण पर्व के शुभारंभ पर जैन आचार्य ज्ञानभूषण जी महाराज और ज्ञान गंगा माता के सानिध्य में शुरू हुए विश्वशांति महायज्ञ में मध्य प्रदेश छिंदवाड़ा से आए बनारसी ने विधिविधान से इंद्र-इंद्राणियों को पूजा अर्चना करायी। शामली के जेके जैन, आलोक जैन, आशीष जैन ध्वजारोहण किया गया।
उद्घाटन प्रवीण जैन, नमोकार जैन ने दीप प्रज्वलित किया। एस के जैन, सुनील जैन ने रोहित जैन, राजकुमार, प्रद्युम्न जैन ने पाद प्रक्षालन किया। विशेष सहयोगी राजकुमार जैन, प्रद्युम्न महा आरती दिनेश जैन मुजफ्फरनगर वालों ने करायी। इस मौके पर श्रीजी को विराजमान किया गया। जैन संत ज्ञान भूषण जी महाराज ने कहा कि धर्म एक ही है। जीव का स्वभाव ही धर्म है।
आत्मा का स्वभाव शीतलता है। धर्म तो प्रत्येक जीव के भीतर है। उत्तम क्षमा मुनिराज की होती है। जिस जीव को झुकने की कला आती है। उत्तम क्षमा नियमित है। जीव को अपना स्वभाव बदलना होगा। क्रोध करना बड़ा दुखदायी है। विवेक वाला व्यक्ति ही उत्तम क्षमा कर सकता है।
इस मौके पर प्रवीण जैन, सुशील जैन, राजीव जैन, अरविंद जैन, मोहनलाल जैन, संजय जैन, मयक जैन, रवि जैन, वैभव जैन, संजीव जैन, सचिन जैन, मनोज जैन आदि मौजूद रहे।