शामली। कैराना लोकसभा सीट पर इस बार भी भाजपा-रालोद गठबंधन का जादू नहीं चल पाया। यह दूसरा मौका है जब इस सीट पर भाजपा रालोद गठबंधन प्रत्याशी को हार का मुंह देखना पड़ा। इससे पहले 2009 में भाजपा-रालोद गठबंधन प्रत्याशी हुकुम सिंह चुनाव हार गए थे। उन्हें बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ी तब्बसुम हसन ने 22463 वोटों से हराया था।
कैराना लोकसभा सीट को इस बार भी भाजपा-रालोद गठबंधन रास नहीं आया। इससे पहले 2009 में भाजपा-रालोद गठबंधन को कैराना सीट पर हार मिली थी। 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा-रालोद गठबंधन से भाजपा के दिग्गज नेता हुकुम सिंह चुनाव लड़े थे। बसपा के टिकट पर तबस्सुम हसन और सपा से शहजान मसूद ने चुनाव लड़ा था। उस समय तबस्सुम हसन को 283259 वोट मिले थे जबकि हुकुम सिंह को 260796 वोट और सपा प्रत्याशी शहजान मसूद को 124802 वोट मिले थे। इस तरह से तबस्सुम हसन ने 22463 वोटों से भाजपा-रालोद गठबंधन प्रत्याशी हुकुम सिंह को हराकर जीत दर्ज की थी।
इस बार लोकसभा चुनाव 2024 में कैराना लोकसभा सीट पर भाजपा-रालोद गठबंधन से प्रदीप चौधरी चुनाव लड़े। उनका मुकाबला सपा प्रत्याशी इकरा हसन से रहा। 19 अप्रैल को पहले चरण में कैराना लोकसभा चुनाव के लिए मतदान हुआ था। मंगलवार को घोषित चुनाव नतीजे में कैराना सीट पर इकरा हसन ने जीत दर्ज की और प्रदीप चौधरी को हार मिली। प्रदीप चौधरी इस सीट पर 2019 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर सांसद चुने गए थे। इस बार उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। इस तरह से देखा जाए तो कैराना लोकसभा सीट पर भाजपा-रालोद गठबंधन दूसरी बार भी जीत दर्ज नहीं करा पाया। संवाद