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इस साल भी अधूरा है रेल परियोजनाओं का सपना

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इस साल भी अधूरा है रेल परियोजनाओं का सपना
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शामली। इस साल भी दिल्ली-शामली, सहारनपुर रेलवे मार्ग का दोहरीकरण- विद्युतीकरण का कार्य पूरा नहीं हो पाया है। नानौता रेलवे स्टेशन पर शिलान्यास के दो साल बाद भी दोहरीकरण- विद्युतीकरण कार्य जस का तस है।
दिल्ली- शामली, सहारनपुर रेलवे मार्ग के दोहरीकरण- विद्युतीकरण की मांग सालों से चली आ रही थी। वर्ष 2014 में केंद्र में मोदी सरकार के गठन के बाद कैराना के तत्कालीन भाजपा सांसद रहे हुकुम सिंह ने केंद्रीय रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा से मिलकर दिल्ली-शामली, सहारनपुर रेलवे मार्ग का दोहरीकरण, विद्युतीकरण और मेरठ-पानीपत नई रेलवे लाइन की परियोजना उनके सामने रखी थी। वर्ष 2016 के रेलवे बजट में रेलमंत्री रहे सुरेश प्रभु ने दिल्ली- शामली, सहारनपुर रेलवे मार्ग के दोहरीकरण विद्युतीकरण के लिए 1500 करोड़ रुपये, मेेरठ- पानीपत नई रेलवे लाइन परियोजना के लिए 2200 करोड़ रुपये की परियोजना का बजट का प्राविधान और कैथल-करनाल से शामली होकर मेरठ के लिए नई रेलवे लाइन का सर्वे की घोषणा की थी। तत्कालीन सांसद हुकुम सिंह ने दिल्ली-शामली, सहारनपुर रेलवे मार्ग के सहारनपुर जिले के नानौता रेलवे स्टेशन पर दिसंबर 2017 में रेलवे राज्यमंत्री मनोज सिन्हा से दोहरीकरण- विद्युतीकरण का शिलान्यास कराया गया था। तीन फरवरी 2018 में सांसद हुकुम सिंह की बीमारी के बाद निधन हो गया। शिलान्यास के दो साल बाद विद्युतीकरण- दोहरीकरण की परियोजना जस की तस है। विद्युतीकरण कार्य पूरा कराने के लिए पहले अंबाला डिवीजन बाद में दिल्ली डिवीजन को कार्य करने के लिए जिम्मेदारी देकर टेंडर छोड़े गए हैं। विद्युतीकरण के नाम पर सिर्फ शामली रेलवे स्टेशन पर लोहे के पुल को ऊंचा किया गया है। स्टेशन परिसर में दोहरीकरण विद्युतीकरण के तहत अधिकारियों, कर्मचारियों के आवास व कार्यालय निर्माण, शामली, कांधला समेत कई रेलवे फाटकों पर हाइट गेज बैरियर जरूर लगाए गए हैं। दोहरीकरण के नाम पर सिर्फ अंडरपास निर्माण कार्य किया है। अंडरपास निर्माण कार्य अभी अधूरा है। विद्युतीकरण- दोहरीकरण का कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। वर्ष 2019 साल गुजर रहा है। परियोजना अधूरी है।
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आखिर कब अस्तित्व में आएगी रेलवे की परियोजना
शामली। आखिर मेरठ- पानीपत नई रेलवे लाइन और कैथल- करनाल, शामली और पानीपत नई रेलवे परियोजना कब अस्तित्व में आएगी। मेरठ-पानीपत नई रेलवे परियोजना पिछले तीन दशकों से चली आ रही है। पूर्व केंद्रीय मंत्री रहीं मोहसिना किदवई की सिफारिश पर तत्कालीन रेलराज्य मंत्री सतपाल महाराज ने दो राज्यों को जोड़ने वाली मेरठ- पानीपत नई रेलवे लाइन परियोजना तैयार कराई थी। सबसे पहले इस रेलवे लाइन का 275 करोड़ रुपये का बजट तैयार करके केंद्र सरकार को परियोजना भेजी गई। ममता बनर्जी ने वर्ष 2009 के रेलबजट में मेरठ- पानीपत नई रेलवे लाइन का सर्वे कराने की घोषणा की गई। वर्ष 2016 में मोदी सरकार में तत्कालीन केंद्रीय रेलवे राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने मेरठ-पानीपत नई रेलवे लाइन के लिए 2200 करोड़ रुपये की परियोजना का बजट प्राविधान और कैथल से करनाल, शामली होकर मेरठ के लिए नई रेलवे लाइन के सर्वे की घोषणा की गई। मेरठ-पानीपत नई रेलवे लाइन के लिए बागपत के सांसद सतपाल सिंह और मुजफ्फरनगर के सांसद व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने गत दो साल पहले अपने लोकसभा चुनाव क्षेत्रों में सर्वे कराया गया था। साल 2019 गुजर रहा है, मगर मेरठ पानीपत नई रेलवे लाइन अस्तित्व में नहीं आ पाई है। मेरठ-पानीपत नई लाइन स्थापना का सपना अधूरा रहा है।
पहले पुरानी परियोजना पूरी होगी
शामली। केंद्र सरकार और रेलवे मंत्रालय पहले पुरानी रेलवे की परियोजनाओं को पूरा करने में लगी है। दिल्ली-शामली, सहारनपुर के दोहरीकरण- विद्युतीकरण,मेरठ-पानीपत व कैथल- करनाल, शामली और पानीपत नई रेलवे परियोजना में शामिल है। पुरानी परियोजना पूरा होने के बाद नए परियोजना का रेलवे और केंद्र सरकार शुरू करने का काम करेंगी : संजीव बालियान : मुजफ्फरनगर सांसद व केंद्रीय राज्यमंत्री ।
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रेलवे मंत्री से मिलकर परियोजनाओं को तेजी से पूरा कराया जाएगा
शामली। मेरठ-पानीपत नई रेलवे लाइन, कैथल- करनाल, शामली, मेरठ परियोजना और दिल्ली-शामली, सहारनपुर रेलवे लाइन का दोहरीकरण-विद्युुतीकरण के संबंध में रेलवे मंत्री पीयूष गोयल से मिलकर परियोजनाओं में तेजी से काम कराया जाएगा।
प्रदीप चौधरी, सांसद कैराना लोकसभा।
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