शामली। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली ने स्पीड पोस्ट की डिलीवरी में लापरवाही के मामले में सुनवाई की। आयोग ने डाक विभाग को सेवा में कमी और लापरवाही मानते हुए 30 हजार रुपये का जुर्माना अदा करने का आदेश सुनाया है।
मोहल्ला आदर्श विहार निवासी राजीव कुमार ने आयोग में उप पोस्टमास्टर डाकघर बागपत और नेशनल सटिंग हब गाजियाबाद के विरुद्ध आठ अगस्त 2024 को परिवाद दायर किया था। परिवादी ने बताया था कि हिमाचल प्रदेश में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अंतर्गत राज्य जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में सदस्य पद के लिए एक हजार रुपये शुल्क के साथ आवेदन किया था।
बागपत में अस्थायी निवास के कारण उन्होंने 25 मई 2024 को बागपत उपडाकघर से स्पीड पोस्ट के माध्यम से आवेदन भेजा था।
परिवादी के मुताबिक आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि तीन जून 2024 निर्धारित थी। परिवादी के अनुसार, आवेदन समय से भेजने के बावजूद डाक गलत स्थान पर पहुंच गई। इसके कारण निर्धारित समय पर आवेदन संबंधित कार्यालय तक नहीं पहुंच सका।
परिवादी ने 19 जून को स्टेटस जांचा तो पता चला कि स्पीड पोस्ट अंतिम तिथि के तीन दिन बाद छह जून 2024 को गलत पते पर शिमला पहुंची। परिवादी ने देरी के कारण अपना आवेदन निरस्त हो गया। मामले की सुनवाई के बाद आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता और सदस्य अमरजीत कौर ने परिवाद स्वीकार करते हुए डाक विभाग को 20 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने और अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए 10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।