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रक्षा बंधन पर धरे रह गए परिवहन निगम के दावे

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शामली में रक्षा बंधन पर रेलवे स्टेशन पर रेल पर चढने के लिये यात्रियो की लगी भीड - फोटो : SHAMLI
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अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। रक्षा बंधन पर यात्रियों की सुविधा के लिए बसों की व्यवस्था करने के परिवहन निगम के दावे धरे रह गए। शामली डिपो में 22 अनुबंधित बसें यात्रियों की भीड़ के आगे कम पड़ गई। प्राइवेट बसों में भी ठसाठस सवारियां भरकर गई। सरकार ने महिलाओं के लिए निशुल्क बस सुविधा की व्यवस्था की थी, इस वजह से भी बसों में काफी भीड़ रही। बस वालों ने भी लंबी सवारी को ही बिठाया, छोटे रूट के यात्री परेशान रहे। बृहस्पतिवार को अमर उजाला ने शहर के कई बस अड्डों का दौरा कर जायजा लिया।
पानीपत बस स्टैंड
करीब नौ बजे पानीपत जाने वाली बस खचाखच भरी थी। परिचालक बस की खिड़की पर खड़ा होकर यात्रियों के टिकट बनाकर ही उन्हें बस में चढ़ा रहा था। परिचालक ने कैराना से पहले किसी का टिकट नहीं बनाया। इसे लेकर कुछ सवारियां नाराज भी थी। परिचालक ने उन्हें सीटें भरने के बाद चढ़ने की नसीहत देकर नीचे ही खड़े रखा। गर्मी के मारे छोटे बच्चों का बुरा हाल था।
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दिल्ली बस स्टैंड
सुबह करीब 10 बजे बड़ौत जाने वाली बस तो खड़ी थी, लेकिन दिल्ली तक जाने वाली बस नहीं थी। कुछ देर बाद दिल्ली जाने वाली बस स्टैंड पर लगी यात्री उसकी और दौड़ेे। बस के रुकने से पहले ही सवारियां एक दूसरे को धक्का मुक्की करते हुए चढ़ने लगी। कुछ महिलाएं जो गोद में बच्चे लिए हुए थे, वह बस में नहीं चढ़ सकी, दो-तीन मिनट मेें बस पूरी भर गई।
मुजफ्फरनगर बस स्टैंड
सुबह करीब एक बजे बस स्टैंड पर काफी भीड़ थी। एक बस यहां पहुंची तो सवारियां उसकी ओर दौड़ी। बस का एक दरवाजा अंदर से लॉक था और दूसरी पर परिचालक खड़ा होकर टिकट बनाने लगा। उसने पहले मुजफ्फरनगर और बघरा के टिकट बताए। छोटी सवारियां बस चलने के बाद जबरन चढ़ने की कोशिश करती रही। दिन पर यही क्रम चला ।
झिंझाना रोड बस स्टैंड
विजय सिनेमा चौक पर झिंझाना की ओर जाने वाली करीब 80 से ज्यादा सवारियां सड़क पर खड़ी थी। इनमें महिलाएं और बच्चे अधिक थे। जैसे ही प्राइवेट बस आई, लोग उसमें आपाधापी कर चढ़ने लगी। बस फुल हो गई तो कुछ युवक छत पर चढ़ गए। बस चली तो कुछ सवारियां दौड़ते हुए छत की सीढ़ियों पर खड़ी हो गई।
ट्रेनों का भी बुरा हाल
शामली। ट्रेनों में भी मारामारी रही। सुबह नौ बजे दिल्ली से सहारनपुर और सहारनपुर से दिल्ली जाने वाली ट्रेनों मे सवारियां की भीड़ थी। पूरे शामली स्टेशन पर पैर रखने तक की जगह नहीं थी। ट्रेन में चढ़ने के लिए भी आपाधापी मची थी। पूरी ट्रेन के डिब्बे फुल थे। कुछ लोग छतों पर भी चढ़ गए। गोद में बच्चे ले रही महिलाएं भी ट्रेनों में खड़े होकर सफर कर रही थी।
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देना पड़ा दोगुना किराया
शामली। बसों की किल्लत के चलते डग्गामार वाहनों ने भी खूब चांदी काटी। मैजिक और थ्री व्हीलर वाले भी ऊपर और नीचे सवारियों को बिठाकर ले जा रहे थे। हालांकि कुछ ऑटो वालों ने छत पर बैठे यात्रियों को उतरने को भी कहा लेकिन वे नहीं माने। दरअसल रोडवेज के अलावा प्राइवेट बस वाले भी छोटे रूट की सवारियां नहीं बिठा रहे थे। लिहाजा यात्रियों को थ्री व्हीलर का सहारा लेना पड़ा। शामली-पानीपत मार्ग पर कैराना, मुजफ्फरनगर मार्ग पर बुटराड़ा-लालूखेड़ी और सहारनपुर रोड पर थानाभवन से पहले की सवारियों को बसों में नहीं चढ़ाया। इन मार्गों पर पड़ने वाले गांवों में जाने वाले यात्रियों ने डग्गामार वाहनों का सहारा लिया।
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