शामली। श्री 1008 सिद्ध चक्र महामंडल विधान के सातवें दिन जैन संत सौरभ सागर महाराज ने कहा कि जीव की काम-क्रोध, लोभ, मोह, माया की तीव्रता शांत नहीं होती। क्रोध जीव का दुख का कारण है। लाचार, बेबस होना जीव के भविष्य को बिगाड़ देना है।
शनिवार को तालाब रोड स्थित जैन धर्मशाला में श्री दिगंबर जैन साधु सेवा समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में जैन संत सौरभ सागर के सानिध्य में हस्तिनापुर से आए पंडित संदीप जैन शास्त्री ने सौधर्म इंद्र, ललित जैन, नीरू जैन यज्ञनायक पंकज जैन, ईशान इंद्र सचिन जैन, प्रीति जैन, सुंदर लाल जैन, श्रीपाल जैन, राहुल जैन को विधि विधान से पूजा अर्चना संपन्न कराई।
जैन संत सौरभ सागर महाराज ने कहा कि जीव को अपने बच्चों की गलती को अनदेखा न करें। गलती संज्ञान में आने के बाद उसे सुधारने का काम करना चाहिए।
घर, परिवार और गृहस्थी में अनुशासन जरूरी है। माया के आने से जीव अहंकारी हो जाता है। माया आने के बाद अहंकार को छोड़ देना होगा, अगर किस्मत के भरोसे चलोगे, तो कुछ नहीं मिलेगा। पुरूषार्थ करोगे तो किस्मत को बदलने में समय नही लगेगा। इस मौके पर पंकज जैन, ललित जैन, मनोज जैन, अरविंद जैन, वीरेश जैन, बिजेंद्र जैन, महेशचंद जैन, जिनेद्र जैन, शरद जैन मौजूद रहे।