शिक्षकों ने मातृभाषा को बढ़ावा देने का लिया संकल्प
शामली। अमर उजाला के हिंदी हैं हम... अभियान के साथ राष्ट्रीय किसान इंटर कॉलेज के शिक्षकों ने कंधे से कंधा मिलाते हुए हिंदी का प्रचार-प्रसार कर छात्रों और नागरिकों को जागरूक करने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि लोगों में जितनी जागरूकता आएगी, उतना ही मातृभाषा का महत्व बढ़ेगा।
शुक्रवार को राष्ट्रीय किसान इंटर कॉलेज शामली के स्टाफ रूम में हुई गोष्ठी में प्रधानाचार्य कैप्टन लोकेंद्र सिंह ने कहा कि अमर उजाला का हिंदी हैं हम अभियान सराहनीय है। अभियान से हिंदी के प्रति लोगों में जागरूकता आएगी। हम सभी को हिंदी को बढ़ावा देने के लिए बच्चों को हिंदी की महत्ता बतानी होगी। आज के दौर में अंग्रेजी पर ज्यादा जोर दिया जाता है, लेकिन बच्चों को यह बताना होगा कि मातृ भाषा हिंदी ही सर्वश्रेष्ठ भाषा है। हिंदी हमारी संस्कृति की पहचान है। छात्रों को शिक्षण कार्य के साथ हिंदी के बारे में जानकारी देकर प्रचार-प्रसार करें। गोष्ठी में सहदेव सिंह मलिक, नीरज बेनिवाल, संतलाल राम, डा. रवि खन्ना, डा. सुशील तोमर, संजीव कुमार, राधेश्याम और दिनेश कुमार आदि शिक्षक मौजूद रहे।
सर्वश्रेष्ठ सबल भाषा है हिंदी
हिंदी का प्रचार-प्रसार तो निरंतर होता ही रहता है, लेकिन आवश्यकता इस बात की है कि हम हिंदी को बोलने और अपनाने में गर्व महसूस करें। हिंदी की महत्ता दुनिया में कहीं कम नहीं है और संप्रेषण में इसके सामने कोई भाषा नहीं टिक पाती। हिंदी सर्वश्रेष्ठ सबल भाषा है।
- डा. रवि खन्ना, शिक्षक।
हिंदी में ही शिक्षा देने की जरूरत
किसी भी विषय को समझने, बोलने में भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका है। किसी देश की प्रगति एवं भविष्य उसकी मातृ भाषा पर निर्भर करती है। यदि शिक्षा को मातृभाषा में दी जाए तो शत-प्रतिशत विश्वास के साथ कह सकता हूं कि उसके समझने एवं प्रसार में सफलता मिलेगी। मुझे गर्व है कि हिंदी मेरी मातृभाषा है।
-डा. सुशील तोमर, शिक्षक।
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हिंदी का विदेशों में भी महत्व
जिस भाषा में एक बिंदु भी अपना महत्व रखता है। उस भाषा को मानना, जानना एवं अधिकाधिक प्रसारित किया जाना आवश्यक है। हिंदी ही ऐसी भाषा है, जिसका महत्व देश ही नहीं विदेशों में भी है। सरकारी कार्यालयों में हिंदी को सहजता से स्वीकार किया जाना चाहिए।
-राधेश्याम, शिक्षक।
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युवाओं को हिंदी के प्रति जागरूक करें
हिंदी से भारत का सर्वांगीण विकास संभव है। मातृ भाषा के प्रति देश के लोगों का झुकाव अधिक होना चाहिए। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विद्यार्थी और अभिभावक हिंदी के प्रति सचेत नहीं हैं। उनमें हिंदी के प्रति जागरूकता लानी होगी। इस साल यूपी बोर्ड की परीक्षा में हिंदी विषय में करीब आठ लाख परीक्षार्थी अनुत्तीर्ण हुए हैं। इसलिए जरूरत है कि युवाओं और छात्रों को हिंदी का महत्व बताते हुए जागरूक करते हुए इसका प्रचार-प्रसार किया जाए।
संतलाल राम, हिंदी प्रवक्ता।
युवाओं को हिंदी के प्रति जागरूक करें
हिंदी हमारी मातृभाषा है। यह सबसे श्रेष्ठ भाषा है, इस पर हम सभी को गर्व करना चाहिए। हम सभी की बोलचाल, लेखन आदि हिंदी में होना चाहिए, तभी इसका महत्व का पता चलेगा और प्रचार-प्रसार होगा। युवाओं को हिंदी के बारे में जानकारी देकर जागरूक करना होगा यह बताना होगा कि हिंदी भाषा ही हमारी पहचान है।
-सहदेव सिंह, शिक्षक।
हिंदी हैं हम...आरके इंटर कॉलेज में अमर उजाला के हिंदी हैं हम अभियान के बारे में शिक्षकों को जानकारी- फोटो : SHAMLI