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Shamli News: कुरान करीम पढ़ने व सुनने का सबसे बड़ा जरिया है तरावीह की नमाज

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शामली रमजान की खबर से सम्ब​धित फोटो मौलाना आजम ।
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शामली। रमजान माह शुरू हो चुका है। रमजान माह में तरावीह का भी विशेष स्थान है। इस पवित्र माह में रोजे की इबादत के बाद तरावीह नमाज का दूसरा अहम स्थान है। तरावीह की नमाज की बड़ी फजीलत है। कुरान करीम पढ़ने व सुनने का सबसे बड़ा माध्यम तरावीह की नमाज है।
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मरकज वाली मस्जिद के कारी शमशाद, मौलाना आजम ने बताया कि पवित्र माह रमजानुल मुबारक के पूरे महीने में 20 रकआत तरावीह मर्द व औरत दोनों के लिए सुन्नतें मुअक्कदा (जरूरी) है। बिना किसी वजह के तरावीह छोड़ने वाला या बीस रकआत से कम रकआत पढ़ने वाला गुनाहगार होगा। तरावीह जमात के साथ पढ़ना सुन्नत है। महिलाओं को अपने घरों में ही तरावीह की नमाज अदा करनी चाहिए। तरावीह की 20 रकआतें पैगंबर मोहम्मद साहब से भी साबित हैं। पिछले चौदह सौ सालों से इसी पर अमल होता आ रहा है।
जो ईमान की हालत में इस महीने के रोजे रखेगा और उसमें कयाम करेगा तो वह गुनाहों से इस तरह पाक और साफ हो जाएगा जैसे उसकी मां ने उसे आज ही जन्म दिया हो। अकीदतमंदों से तरावीह की नमाज हर हाल में अता करने की अपील की है।

शामली रमजान की खबर से सम्बधित फोटो मौलाना आजम ।

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