गन्ना मूल्य : मिल बता रहीं नुकसान, ज्यादा मांग रहे किसान
शामली। लखनऊ में गन्ना मूल्य को लेकर मंथन चल रहा है। जल्द ही मूल्य की घोषणा भी हो सकती है। मूल्य निर्धारण को लेकर किसानों और शुगर मिलों के अपने-अपने तर्क हैं। मिलें रिकवरी घटने और चीनी के दाम कम होने के कारण गन्ने का मूल्य बढ़ाने का विरोध कर रहीं हैं, जबकि किसान लागत बढ़ने की बात कहते हुए 400 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं।
गन्ना उत्पादन लागत बढ़ी तो मूल्य भी बढ़े
-शामली चीनी मिल में सप्लाई करने वाले बलवा गांव के प्रगतिशील किसान राकेश शर्मा का कहना कि गन्ने की खेती में प्रति बीघा 66 से 67 क्विंटल उत्पादन है। इस साल पौधे पर प्रति क्विंटल लागत मूल्य 374.20 रुपये तथा पेड़ी पर 323.55 रुपये प्रति क्विंटल आई है, जिसका औसत 348.87 रुपये है। सरकारी फार्म पर 300 रुपये लागत मूल्य आने का कारण शामली में मजदूरी महंगी होना बताते हैं। भाकियू के जिलाध्यक्ष कपिल खाटियान का कहना है कि महंगी लागत के हिसाब से गन्ने का मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया जाए।
डीजल, बिजली के औसत से बढ़े गन्ना मूल्य
शामली। गन्ने की लागत बढ़ गई है। खुद गन्ना शोध संस्थान उत्तर प्रदेश ने 10 रुपये लागत बढ़ाने की बात स्वीकार की है, लेकिन सही तरीके से देखा जाए तो खाद, बीज, बिजली और डीजल के जो रेट बढ़े हैं, उसके अनुपात में ही गन्ने का मूल्य बढ़ाया जाए। - सवित मलिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष, किसान यूनियन।
अखिलेश सरकार की तर्ज पर गन्ना मूल्य बढ़ाएं
शामली। वरिष्ठ सपा नेता डा. सुधीर पंवार का कहना है कि चीनी मिलों द्वारा सरकार से गन्ना मूल्य न बढ़ाने की वकालत करना किसान विरोधी है। भाजपा की केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा चीनी मिलों को हजारों करोड़ रुपये के पैकेज दिए गए। चीनी एवं इथेनॉल के न्यूनतम मूल्य तय किए गए और इस साल उनमें छह प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी भी कर दी गई। किसानों की और से कोई विरोध नहीं हुआ। योगी सरकार के पिछले चार सालों मे गन्ना मूल्यों में केवल 10 रुपये क्विंटल बढ़ाने की बात कर रही है।
कम रिकवरी से चीनी का कम हुआ उत्पादन
शामली। ऊन चीनी मिल के यूनिट हेड जीएस खेरा का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस साल गन्ना रिकवरी में गिरावट है। गन्ने का मूल्य 325 रुपये प्रति क्विंटल और चीनी का मूल्य 3150 रुपये प्रति क्विंटल है। गन्ने के मूल्य के साथ सरकार चीनी के दाम भी बढ़ाए। थानाभवन चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक जेबी तोमर का कहना है कि रिकवरी कम होने से चीनी का उत्पादन कम हो रहा है। पिछले साल की तुलना में इस साल 0.65 प्रतिशत रिकवरी कम है। उनका कहना है कि एक क्विंटल गन्ने में 10.45 किलो चीनी बनती है। पिछले साल एक रिकवरी 11 प्रतिशत थी। शामली चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक कुलदीप पिलानिया का कहना है कि इस बार गन्ने की रिकवरी कम है। सरकार को चीनी के दाम भी बढ़ाने चाहिए।
जिले की चीनी मिलों का रिकवरी औसत- शुगर मिल- 2020-21- - 2019- 20
- 1- शामली- 10.10 - -10.81
- 2- ऊन -- 9.93- -10.70-
- 3- थानाभवन- 10.45- 11.10