शामली। छोटा जिला होने के बावजूद शामली जनपद का उद्योग के क्षेत्र में अहम योगदान हैं। यहां के लघु उद्योग जिले के विकास में अहम योगदान देते हैं। रिम-धुरा उद्योग की अपनी अलग पहचान है। रिम-धुरा बनाने की करीब 32 फैक्टरियों के साथ यहां पर 65 लघु उद्योग संचालित हैं जबकि सूक्ष्म उद्योगों की तो भरमार है।
उद्योग केंद्र के आंकड़ों के अनुसार एमएसएमई के अंतर्गत जिले में लगभग 2700 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग पंजीकृत हैं। सूक्ष्म उद्योगों में आटा चक्की, स्पेलर, बैटरी बनाना जैसे छोटे-मोटे उद्योग शामिल हैं। इनकी संख्या करीब 2628 के आसपास है। लघु उद्योगों के अंतर्गत ऐसे उद्योग आते हैं जिनमें 25 लाख से पांच करोड़ रुपये कीमत तक की मशीनें स्थापित होती हैं। इसमें जिले के करीब 65 उद्योग शामिल हैं, जिनमें से 32 फैक्टरियां रिम-धुरा उद्योग की हैं। यह उद्योग एक जिला एक उत्पाद में भी शामिल है।
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लॉकडाउन के बाद पटरी पर लौटने लगे उद्योग
शामली। लॉकडाउन के दौरान जिले के उद्योगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा लेकिन अब लगभग 90 प्रतिशत उद्योग पटरी पर लौट आए हैं। आईआईए शामली के चेयरमैन अशोक कुमार मित्तल बताते हैं कि धीरे-धीरे उद्योगों की स्थिति सुधर रही है। वह बताते हैं कि छोटी इंडस्ट्रीज में तो श्रमिकों की उपलब्धता लगभग पूरी हो गई है लेकिन पेपर, स्टील, कैरियर व्हील फैक्टरियों में कुशल श्रमिक पहले के मुकाबले 60 से 70 प्रतिशत ही हैं।
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ओडीओपी से जिले को बहुत ज्यादा लाभ नहीं
रिम-धुरा हब एग्रीकल्चर एंप्लीमेंट मेन्युफैक्चर एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रवींद्र जैन बताते हैैं कि एक जिला, एक उत्पाद में शामिल होगर रिम-धुरा उद्योग को कोई लाभ नहीं मिला है। इसके अंतर्गत जनपद में कोई नई इंडस्ट्री स्थापित नहीं हुई है। वह बताते हैं कि उद्यमियों को छूट दी जानी चाहिए थी, जो नहीं मिली। रिम-धुरा फैक्टरियों में कुशल कारीगरों की कमी है। श्रमिकों का स्किल बढ़ाने की आवश्यकता है।
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जिले के उद्योगों का छह हजार करोड़ का टर्नओवर
शामली इंडस्ट्रीज स्टेट मैन्युफैक्चर एसोसिएशन (शायमा) के अध्यक्ष अंकित गोयल बताते हैं कि जिले के उद्योगों का लगभग छह हजार करोड़ रुपये का टर्नओवर है। इनमें सबसे ज्यादा योगदान लघु एवं मध्यम उद्योगों का ही है। वह बताते हैं कि जिले में रिम-धुरे के अलावा लकड़ी की चम्मच बनाने, पेपर, बर्तन, गत्ते के डिब्बे बनाने, कृषि यंत्र बनाने आदि उद्योग हैं। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के बाद उद्योगों की स्थिति सुधर रही है और धीरे-धीरे अपने पुराने रूप में आ रहे हैं।
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इन्होंने कहा...
एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत इस वर्ष 17 लोन आवेदन बैंकों को भेजे गए, जिनमें से दो को लोन का वितरण किया गया। इस योजना में उद्योगों को ऋण पर सब्सिडी दी जाती है। लॉकडाउन में प्रभावित हुए उद्योग अब पटरी पर आ गए हैं। लगभग सभी का संचालन हो रहा है तथा श्रमिकों की भी कमी नहीं है। - डा. बनवारी लाल, सहायक आयुक्त उद्योग।
शामली औद्योगिक क्षेत्र में रिम धूरा फैक्ट्री- फोटो : SHAMLI