शामली। यदि किसान गन्ने की बुवाई के 25 दिन बाद सहफसली के रूप में सरसों की बुवाई करते हैं, तो गन्ने का उत्पादन डेढ़ गुना अधिक बढ़ जाता है। यह कहना है कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. विकास मलिक का। उनके द्वारा गन्ने की बुआई के बाद सरसों की बुआई की सहफसली की बुआई की नई तकनीकि शामली समेत कई जिले में इजाद की गई है।
उनका कहना है कि इस तकनीकी का परीक्षण बिजनौर, बुलंदशहर बदायूं, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और शामली आदि जनपदों में समय-समय पर किया है। पिछले 16 वर्षों से परीक्षण किया जा रहा था। जसाला के प्रगतिशील किसान रणवीर सिंह, कृषि विज्ञान केंद्र जलालपुर के कृषि फार्म और सहारनपुर के बिडवी के सुधीर के यहां खेत में प्रयोग किया गया। गन्ने की नई तकनीक के द्वारा गन्ने के उत्पादन में डेढ़ गुना तक बढ़ोतरी की जा सकती है। इस तकनीकी का मुख्य आधार शरद कालीन गन्ने की बुवाई पर ही रखा गया है। इसमें शरद कालीन गन्ने की बुवाई सितंबर माह में करते हैं, लेकिन सहफसली की बुवाई सितंबर माह में न करके उसके 21 से 25 दिन उपरांत अक्तूबर माह में लगाने का सिद्धांत है। गन्ने की नई तकनीक के द्वारा गन्ने के उत्पादन में डेढ़ गुना तक बढ़ोतरी की जा सकती है। यह तकनीक जनपद शामली के किसानों द्वारा बहुत तेजी से अपनाई जा रही है।
तकनीकि शोध की सराहना की
शामली। कृषि विज्ञान केेंद्र के जलालपुर के प्रभारी डॉ. सतीश कुमार, सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ के कुलपति प्रोफेसर आरके मित्तल कहा कि वैज्ञानिक डॉ. विकास मलिक के तकनीकी शोध की सराहना की है। गन्ना किसानों के लिए एक क्रांतिकारी परिवर्तन के रूप में साबित होगी।
कोट...
सरसों-गन्ना की सह फसली में 70 क्विंटल गन्ना, एक बीघा में एक क्विंटल सरसों का औसत था। यदि गन्ने बुआई के 21-25 दिन बाद सरसों की बुआई की जाए तो, एक बीघा में 100-105 क्विंटल गन्ने की फसल और एक बीघा में एक क्विंटल सरसों का औसत आया है। नई शोध में किसान को 35- 40 क्विंटल गन्ने की पैदावार बढ़ी है। - डॉ. विकास मलिक, कृषि वैज्ञानिक