ये है सरकारी स्कूलों की दशा....
- उच्च प्राथमिक विद्यालय बलवा का भवन 59 साल पुराना, ध्यान किसी का नहीं
- अधिकारियों के पास निरीक्षण का भी समय नहीं कैसी है पाठशाला
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली/ ऊन/ कांधला। जर्जर छत, दीवारों में दरार से झांकता खतरा और कमरों के अंदर जलभराव। यही है जिले के सरकारी स्कूलों की तस्वीर। विद्यार्थी छत गिरने के डर से सहमे रहते हैं। इन्हीं चिंताओं के समाधान के लिए आज से शुरू हो रहा है हमारा विशेष अभियान कैसी है पाठशाला। पेश है पहली रिपोर्ट...।
शुक्रवार को जनपद में सरकारी स्कूलों के भवनों की पड़ताल की गई, तो दो स्कूलों की स्थिति डराने वाली मिली। बलवा के उच्च प्राथमिक विद्यालय के कमरे जहां जर्जर मिले वहीं कांधला देहात के प्राइमरी स्कूल के कमरों के अंदर भी जलभराव मिला। अधिकारियों के पास निरीक्षण करने तक का समय नहीं है।
पड़ताल के दौरान इस तरह की स्थिति मिली...
स्थान : बलवा गांव का उच्च प्राथमिक विद्यालय
स्कूल कक्षा छह से लेकर आठवीं तक है। यहां पर 190 बच्चे पंजीकृत हैं। स्वीकृत सात पदों पर शिक्षकों की तैनाती है। वर्ष 1966 में जिला पंचायत द्वारा स्कूल को बनवाया गया था। स्कूल के कमरे जर्जर हालत में हैं। छत का प्लास्टर भी उखड़ा हुआ है। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत फर्श तो यहां बनवा दिया गया। मगर जर्जर इमारत की तरफ ध्यान नहीं दिया।
प्रधानाध्यापक बिजेंद्र ने बताया कि स्कूल में सात कमरे मिले, जिसमें से तीन कमरों में कक्षा चल रही थी, लेकिन चार कमरों में अधिक जर्जर होने के कारण ताला लगा है। मिड-डे मील में आज दाल-रोटी खिलाई। प्रधानाध्यापक ने बताया कि स्कूल जर्जर होने के कारण हर समय बच्चों की जान का डर सताता रहता है। पिछले साल स्कूल बिल्डिंग की नीलामी होनी थी, लेकिन स्कूल बनने तक कहीं व्यवस्था न हो पाने के कारण नीलामी रुकवा दी गई है। विभाग को बार-बार लिखित में देने के बाद भी जर्जर स्कूल में ही पढ़ाना पड़ रहा है।
स्थान : कांधला देहात का प्राइमरी स्कूल
स्कूल का निर्माण वर्ष 1996 में हुआ था। स्कूल का निर्माण ग्राम पंचायत ने कराया था। प्रधानाध्यापक के अनुसार करीब दस साल पहले ग्राम प्रधान ने ही स्कूल का नवीनीकरण कराया था। स्कूल मेंं कक्षा एक से लेकर आठवीं तक के 248 बच्चे बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यहां पर दस शिक्षक तैनात हैं। पांच में से तीन कमरों में ही अब पढ़ाई कराई जा रही है। सभी कमरे जर्जर हालत में हैं। देखरेख का जिम्मा ग्राम प्रधान का ही है। स्कूल अधिक नीचे होने के कारण हल्की सी बरसात होने पर तालाब का रूप ले लेता है। दो दिन से हो रही बारिश के कारण इन कमरों में भी पानी भरा है, जिसके कारण बृहस्पतिवार को बच्चे नहीं पहु़ंचे।
प्रधानाध्यापक साजिद अली ने बताया कि जलभराव की समस्या कई महीने से चल रही है। अब पास में ही किराए पर कमरा लेकर बच्चों का पढ़ाया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कोई सहयोग स्कूल को नहीं मिलता।
अभिभावक इकबाल, साजिद, हारुन, इंतजार मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत कर चुके हैं। समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। फिर से डीएम से शिकायत करने की बात कही्र है।
इन्होंने कहा..
कुछ जर्जर स्कूलों का जिले में ध्वस्तीकरण कराया जा चुका है। जल्द ही अन्य का ध्वस्तीकरण कराया जाएगा। ग्रांट आते ही ध्वस्तीकरण वाले स्कूलों में काम शुरू कराया जाएगा। प्रयास रहेगा कि छात्राें को परेशानी नहीं होने दी जाए। - लता राठौर, बीएसए शामली
कांधला देहात के प्राथमिक विद्यालय में बरसात के कारण घुसा पानी । संवाद- फोटो : मेज की ड्रार में रुपये रखते हुए महिला।, मेज की ड्रार से रुपये निकालते डॉक्टर।, रुपये निकाल कर जेब में रखते डॉक्टर।
कांधला देहात के प्राथमिक विद्यालय में बरसात के कारण घुसा पानी । संवाद- फोटो : मेज की ड्रार में रुपये रखते हुए महिला।, मेज की ड्रार से रुपये निकालते डॉक्टर।, रुपये निकाल कर जेब में रखते डॉक्टर।
कांधला देहात के प्राथमिक विद्यालय में बरसात के कारण घुसा पानी । संवाद- फोटो : मेज की ड्रार में रुपये रखते हुए महिला।, मेज की ड्रार से रुपये निकालते डॉक्टर।, रुपये निकाल कर जेब में रखते डॉक्टर।
कांधला देहात के प्राथमिक विद्यालय में बरसात के कारण घुसा पानी । संवाद- फोटो : मेज की ड्रार में रुपये रखते हुए महिला।, मेज की ड्रार से रुपये निकालते डॉक्टर।, रुपये निकाल कर जेब में रखते डॉक्टर।
कांधला देहात के प्राथमिक विद्यालय में बरसात के कारण घुसा पानी । संवाद- फोटो : मेज की ड्रार में रुपये रखते हुए महिला।, मेज की ड्रार से रुपये निकालते डॉक्टर।, रुपये निकाल कर जेब में रखते डॉक्टर।