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श्री कृष्ण ने किया कंस का वध: ब्रह्मा स्वरूपानंद

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कैराना। शिव सेवा सनातन मंडल समिति के तत्वाधान में नवरात्र के अवसर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कहा कि इंसान पर कैसी भी विपत्ति आ जाएं वह केवल भगवान की शरण में रहने से ही दुख और कष्टों से मुक्ति मिलती है।
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शनिवार को प्राचीन सिद्धपीठ बाबा बनखंडी महादेव मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में श्री 1008 विश्व विद्यानंद महाराज के शिष्य ब्रह्मा स्वरूपानंद ने कहा कि देवराज इंद्र ने जो प्रलय के बादलों को आदेश दिया कि जाओ ब्रज का विनाश कर दो। इसी बात को लेकर गोप गोपियां श्री कृष्ण की शरण में पहुंचे और ब्रज को बचाने की विनती की। जिस पर श्रीकृष्ण ने ब्रज वासियों को बचाने हेतु गोवर्धन का मान बढ़ाते हुए इंद्र के अभिमान का दमन किया। उन्होंने आगे कहा कि अभिमान और अहंकार भगवान किसी का नहीं छोड़ते। जब गोपियों के संग श्री कृष्ण ने रासलीला की तो गोपियों को सुंदरता का अहंकार हो गया, उसी समय श्री कृष्ण अंर्तध्यान हो गए। जब सभी का अहंकार नष्ट हो गया तो श्री प्रभु ने अपने दर्शन दे दिए। कंस ने श्री कृष्ण को मथुरा लाने के लिए कहा जिस पर श्री कृष्ण और बलराम ने उनका अहंकार को नष्ट करते हुए उनके असुरों का वध कर दिया। जिससे प्रजा को उनके अत्याचारों से बचाया। इस मौके पर भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे तो वही समिति के अध्यक्ष पंडित स्वराज शर्मा, अनिल मित्तल एडवोकेट, रमेश गर्ग, राकेश कुमार, अभिषेक गोयल, अशोक कुमार, अंकुर भारद्वाज आदि का सहयोग रहा।
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